Women Reservation Bill: महिला आरक्षण लागू कब होगा? सरकार विपक्ष के सामने चुनौती, आधी दुनिया के लिए दिल्ली बहुत दूर

महिला आरक्षण लागू कब होगा?

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण लागू कब होगा? सरकार विपक्ष के सामने चुनौती, आधी दुनिया के लिए दिल्ली बहुत दूर

महिला आरक्षण लागू कब होगा? सरकार विपक्ष के सामने चुनौती है। आधी दुनिया के लिए दिल्ली अभी बहुत दूर है।

कानपुर, [महेश शर्मा]। महिला आरक्षण विधेयक यानी नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 लोकसभा में भारी बहुमत से पास हो गया। यह विधेयक राज्यसभा में भी पास हो जाएगा। सबसे बड़ी चुनौती इसके क्रियान्वयन को लेकर है। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि चुनाव बाद जनगणना और परिसीमन भी होगा।

इससे तो लगता है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही 2027 में यूपी समेत कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव तक यह लागू किया जा सकता है। विपक्ष इसमें संशय जता रहा है। वह ओबीसी को भी महिला आरक्षण कोटे में लाने की मांग पुरजोरी से उठा रहा है। यानी कोटा के भीतर कोटा।

मोदी सरकार पूर्ण बहुमत में है इसलिए इसके लागू होने में किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए। पर सवाल उठता है कि कानून कब बनेगा और कब तक लागू होगा? पुराना अनुभव तो काफी खट्टा रहा। 

यहां पर यह बताना जरूरी है कि पंचायत स्तर पर 1992 में 33 फीसदी आरक्षण कानून बनाए जाने के बाद भी इसके लोकसभा व विधानसभा तक आते-आते कुछ दशक लग गए। इसके लिए महिलाओं की कम राजनीतिक समझ को भी जिम्मेदार बताया जाता रहा।

प्रॉक्सी पॉलिटिक्स जिस तरह पंचायतस्तर पर महिला आरक्षण को सही ढंग से लागू नहीं होने दिया तो इस बात की क्या गारंटी कि यही बात लोकसभा और विधानसभा में आड़े नहीं आएगी। आज भी सरपंच पति, पार्षद पति ही ज्यादातर काम करते हैं। तब विधायकपति, सांसद पति की चला करेगी। यही नहीं आरक्षण लागू करते समय यह कैसे तय करेंगे कि आरक्षण का लाभ नेताओं की बेटी पत्नी बहुएं नहीं उठाएंगी। 

आम महिलाओं को तो फिर इसका लाभ मिलता नहीं दिखायी देता। इसके लिए कड़े आदेश देने के साथ ही नेताओं को भी अपने आपको समझाते हुए परिवारवाद की राजनीति से दूर रहना होगा। पंचायतों में आरक्षण का अनुभव काफी कुछ सिखाता है। महिला नेतृत्व विकसित करना बड़ी चुनौती है। इनकी भागीदारी पुरुषों की तरह नहीं हो पाती।

हालांकि लोकसभा और यूपी की विधानसभा के पीठासीन अधिकारियों ने महिलाओं को बहस में भाग लेने और बोलने का पूरा मौका दिया। यूपी विस अध्यक्ष सतीश महाना ने महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया। बताते हैं कि मॉक सेशन तक का सहारा लिया। महिलाओं को रबर स्टैंप बनने से बचाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को उन्हें प्रशिक्षण देना होगा और संगठन में भी कम से कम 33 फीसदी आरक्षण पार्टियां स्वत: दें।

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