पीलीभीत: बाघ संरक्षण के दावे..आखिर कहां गुम हो गए हैं अमरिया के बाघ, ओम और त्रिशूल भी गायब?

पीलीभीत: बाघ संरक्षण के दावे..आखिर कहां गुम हो गए हैं अमरिया के बाघ, ओम और त्रिशूल भी गायब?

सुनील यादव, पीलीभीत, अमृत विचार। बाघों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले जिले में ही अब बाघों की सुरक्षा को लेकर कोई संजीदगी नहीं दिखाई दे रही है। बताते हैं कि अमरिया क्षेत्र के रिहायशी इलाके में एक दशक से विचरण करने वाले बाघों में अब अधिकांश बाघ लापता हैं। 

यह बाघ कहां गुम हो गए, महकमा भी इसको लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रहा है। बाघों के साथ अनहोनी की आशंका को लेकर कयास भी लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह भी साफ है, क्योंकि पूर्व में यहां बाघों का शिकार करने के प्रयास भी हो चुके हैं। बता दें कि दो बाघ जोकि शरीर के निशान से त्रिशूल और ओम वह भी नहीं दिख रहे?

पीलीभीत में बाघों की मौजूदगी देश भर में चर्चा का विषय है। चाहे वह सामाजिक वानिकी का क्षेत्र हो या फिर पीलीभीत टाइगर रिजर्व, बाघों की मौजूदगी हर जगह देखी जाती है। बाघों की एकाएक बढ़ी संख्या को लेकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन पूर्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड भी जीत चुका है। वर्ष 2012 में जंगल से निकलकर अमरिया क्षेत्र में पहुंचे एक बाघिन और दो शावकों से शुरू सिलसिला एक दशक बाद 11 बाघों तक आ पहुंचा था। 

शुरूआत में रिहायशी इलाके में पहुंचे बाघों के कुनबे को देख लोग दहशतजदा देखे गए थे, लेकिन बाघों के शांत स्वभाव के लोग इसके अभ्यस्त हो गए। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर बाघ हमले को कोई बड़ा मामला प्रकाश मे नहीं आया। चूंकि यह इलाका सामाजिकी वानिकी प्रभाग के अंतर्गत आता है। ऐसे में यहां के बाघों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सामाजिक वानिकी को सौंप दी गई। 

उस दौरान ही अमरिया के विशनपुर, गजरौला फार्म, शुक्ला फार्म, कटइैया बढ़नी समेत अन्य स्थानों पर बाघों की बढती मूवमेंट पर इसकी जानकारी शासन स्तर पर दी गई। इसके बाद इन बाघों की शिफ्टिंग को लेकर तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने प्रयास भी शुरू किए। उन्होंने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट से इन बाघों की शिफ्टिंग की अनुमति के लिए पत्र भी भेजा था, मगर ठोस रणनीति न बनने के कारण मामला ठंडे बस्ते में जाता रहा।

साल भर से अधिकांश बाघों का नहीं दिख रहा मूवमेंट
अमरिया क्षेत्र के गन्ने के खेतों में सालों तक अपनी मौजूदगी का अहसास कराने वाले बाघों में अब अधिकांश बाघ दिखाई नहीं दे रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक साल से अधिक समय से सात-आठ बाघों की कोई मूवमेंट देखने को नहीं मिल रहा है। इसको लेकर आम आदमी के मन में तो संशय है कि आखिर यहां रहने वाले बाघ कहां गुम हो गए, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई खास परवाह नहीं दिख रही है। हालांकि हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि अमरिया के रिहायशी इलाके में दिखने वाले बाघ आते जाते रहते हैं।

बाघों के शिकार के भी हो चुके हैं प्रयास
अमरिया के रिहायशी इलाके में रह रहे इन बाघों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार महकमे द्वारा भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हो, लेकिन पिछले कुछ सालों में इन बाघों का शिकार करने के प्रयास भी हुए है। करीब पांच साल पहले अमरिया में शिकारियों द्वारा लगाए गए तार के फंदे में एक बाघ फंस गया था। हालांकि बाघ घंटों की मशक्कत के बाद खुद ही तार के फंदे से निकल भागा था। 

मामले की जानकारी पर एनटीसीए के तत्कालीन डीआईजी निशांत वर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर जानकारी जुटाई थी और बाघों की पर्याप्त सुरक्षा को लेकर दिशा निर्देश दिए थे। इसके बाद ललौरीखेड़ा क्षेत्र में अमरिया से पहुंची एक बाघिन गन्ने के खेत में लगे लोहे के फंदे में फंस गए। बाघिन के दहाड़ने पर जब लोगों की इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने महकमे को इस बाबत बताया। देर रात फंदे में फंसी बाघिन को घंटो बाद फंदे से रेस्क्यू कर आजाद कराया गया था।

अमरिया में विचरण कर रहे बाघों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। लगातार निगरानी भी की जा रही है।दोनों राज्यों की सीमा लगी होने के कारण यहां के बाघ अकसर आते जाते रहते हैं। ऐसे में बाघों की मूवमेंट घटती बढ़ती रहती है। - पीयूष मोहन, रेंज अधिकारी, सामाजिक वानिकी प्रभाग

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