बरेली: नहर की भूमि पर कब्जा कर बसाईं गईं कूर्मांचल नगर और महानगर कॉलोनी

बरेली: नहर की भूमि पर कब्जा कर बसाईं गईं कूर्मांचल नगर और महानगर कॉलोनी

राकेश शर्मा, बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड नहर खंड की भूमि पर कब्जा कर कूर्मांचल नगर और महानगर काॅलोनी बसाई गईं हैं। कालोनियों के निर्माण में 2746.78 वर्ग मीटर नहर की भूमि पर कब्जा किया गया था। नहर भूमि पर कब्जा कर कूर्मांचल नगर कॉलोनी बसने के मामले में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत होने के आरोप लगे लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

जिलाधिकारी ने रुहेलखंड नहर खंड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन वादों में निर्णय विभाग के पक्ष में आए हैं, उनमें भूमि पर कब्जा लेने की कार्रवाई कराएं। जिलाधिकारी के आदेश पर रुहेलखंड नहर खंड व तहसील सदर ने बिल्डरों के कब्जे वाली भूमि पर कब्जा लेने की तैयारी शुरू कर दी है।

वर्ष 2021 से जुलाई तक नगर मजिस्ट्रेट की कोर्ट से रुहेलखंड नहर की भूमि पर हुए कब्जों के तीन मामलों में फैसला सुनाया गया था। तीनों निर्णय में नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने विपक्षी बिल्डरों को कब्जे वाली भूमि से बेदखल करते हुए क्षतिपूर्ति और किराये के रूप में मिलाकर करीब एक करोड़ से अधिक का जुर्माना भी लगाया। एक बिल्डर केसी पंत से धनराशि वसूलने की कार्रवाई जारी है।

इस मामले में रुहेलखंड नहर खंड की ओर से सिंचाई विभाग की टीम भी तय कर दी है। टीम में जिलेदार अतिक्रमण सईद अब्बास जैदी, सींच पर्यवेक्षक कल्लू राम और सींच पर्यवेक्षक छोटे को शामिल किया है। 

रुहेलखंड नहर खंड के सहायक अभियंता तृतीय वैभव बाजपेयी ने 6 दिसंबर को एसडीएम सदर के लिए नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट से हुए तीनों आदेशों की प्रतियों के साथ पत्र भेजा। जिसमें सिंचाई विभाग की भूमि पर किए अतिक्रमण के खिलाफ वादों में पारित निर्णय के आधार पर भूमि पर कब्जा प्राप्त करने के लिए गाटा संख्याओं के चिह्नाकन की जरूरत बताई।

एसडीएम सदर से भूमि के चिह्नाकन के लिए सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित करने का आग्रह किया। एसडीएम सदर रत्निका श्रीवास्तव ने तहसीलदार सदर को राजस्व टीम से जांच कराकर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, 18 सितंबर 2021 को तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट मदन कुमार की कोर्ट ने निर्णय देते हुए कहा कि कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों का अवलोकन किया और वादी के अधिवक्ता को सुना। जिससे स्पष्ट है कि नहर विभाग की गाटा संख्या 450, रकबा 0.6550 हेक्टेयर में से 121.92 वर्ग मीटर पर विपक्षी ने धौरेरा माफी के पास महानगर कॉलोनी के निर्माण के समय अवैध कब्जा किया। 

खतौनी ग्राम धौरेरा माफी फसली वर्ष 1418-1423 के अनुसार गाटा संख्या 450 का कुल रकबा 0.6550 हेक्टेयर नहर विभाग के नाम अंकित है। विपक्षी अरविंदर सिंह बग्गा ने नहर विभाग की उपरोक्त भूमि 121.92 वर्ग मीटर अनाधिकृत रूप से कब्जा की।

सुनवाई में विपक्षी की ओर से कोई ऐसा ठोस अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए विपक्षी को कब्जे वाली भूमि से बेदखल कर दिया। साथ ही क्षतिपूर्ति के रूप में एक लाख 41 हजार 102 रुपये का जुर्माना लगाया। वाद योजित होने की तिथि 27 अगस्त 2011 से कब्जा हटाने की तिथि तक प्रतिमाह 2106 रुपये किराये का जुर्माना भी लगाया था। वहीं, एक अन्य मामले में बिहारमान नगला क्षेत्र में खसरा नंबर 924 के क्षेत्रफल 1096.20 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा किया। 

नगर मजिस्ट्रेट रेनू सिंह की कोर्ट ने 22 जुलाई को नहर विभाग की संपत्ति से बिल्डर अरविंदर सिंह बग्गा को बेदखल कर दिया। नहर की भूमि पर चारदीवारी बनाकर अनाधिकृत कब्जा कर सरकार को नुकसान पहुंचाने के आरोप में क्षतिपूर्ति डाली गई। 2005 के अप्रैल से जांच तक दो लाख 46 हजार 116 रुपये की क्षतिपूर्ति डाली और वाद दायर होने की तिथि जनवरी 2008 से वसूली की तिथि तक की क्षतिपूर्ति/किराया 18932 रुपये की दर से वसूली के लिए रुहेलखंड नहर खंड के सक्षम अधिकारी को आदेश जारी किए थे।

परतापुर जीवन सहाय में 1528.66 वर्ग मीटर नहर की भूमि पर किया है कब्जा
17 सितंबर 2021 को तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट मदन कुमार की कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि अभिलेखीय साक्ष्यों का परीक्षण किया। जिससे स्पष्ट हुआ है कि रुहेलखंड नहर खंड की गाटा संख्या-96 की कुल भूमि 0.5889 हेक्टेयर है, जिसके 1528.66 वर्ग मीटर भूमि पर विपक्षी ने अवैध रूप से कब्जा किया है। परतापुर जीवन सहाय गांव में नहर की भूमि पर कब्जा कर बिल्डर केसी पंत समेत अन्य पर कूर्मांचल नगर कालोनी विकसित करने का आरोप है। वादी ने भूमि पर विपक्षी का कब्जा 1 अप्रैल 2000 से दर्शाया है। 

कोर्ट ने आदेश में कहा है कि यदि यह सही है तो सिंचाई विभाग ने 11 वर्षों तक अपनी जमीन पर कब्जा लेने के लिए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया। जांच कराकर दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करते हुए अवैध कब्जे में उनकी शिथिलता/संलिप्तता के लिए क्षतिपूर्ति उन्ही से वसूली जाए, क्योंकि इतने बड़े भू-भाग पर कब्जा होने के बावजूद 11 साल तक सोते रहे। प्रतिवादी के कथन और नहर विभाग द्वारा वाद पत्र में उल्लेख तथ्य से स्पष्ट है कि कब्जा वर्ष 2000 से किया गया है। 

चूंकि गाटा संख्या-96 की भूमि नहर विभाग की है जिस पर किसी प्रकार का कब्जा या विक्रय करना शून्य है। विपक्षी द्वारा कोई ठोस अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे उसके द्वारा नहर की भूमि पर कब्जा न करने की बात स्पष्ट हो सके। इसलिए करीब 1528.66 वर्ग मीटर भूमि से विपक्षी को बेदखल किया जाता है। कोर्ट ने 1 अप्रैल 2000 से लेकर 31 मार्च 2011 तक कुल 34 लाख 84 हजार 800 रुपये क्षतिपूर्ति में जुर्माना लगाया और वाद पत्र में दर्ज तिथि 1 अप्रैल 2011 से लेकर अवैध कब्जे वाली संपत्ति के बेदखली तक 26400 रुपये प्रतिमाह का किराया भी वसूल किया जाएगा।

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