लखनऊ : आदर्श ग्रामों में खर्च का हिसाब नहीं, डीएम के आदेश पर जांच शुरू

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : जिले में 'प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना' के तहत वर्ष 2019-20 में आदर्श बनाए गए 16 ग्रामों में खर्च लाखों रुपये का हिसाब नहीं है। केंद्र ने बजट का हिसाब मांगा तो समाज कल्याण विभाग की कार्यदायी संस्था विकास कार्यों में खर्च धनराशि का उपभोग प्रमाण पत्र नहीं दे पाईं। गड़बड़ी की आशंका पर जिलाधिकारी ने कमेटी बनाकर जांच बैठा दी है।

योजना के तहत 50 फीसद से अधिक अनुसूचित जाति बाहुल्य के वर्ष 2019-20 में 17 गांव चयनित हुए थे। कार्यदायी संस्था ने केंद्र से मिले प्रति गांव 20-20 लाख रुपये से कार्य कराए। जब केंद्र ने इन गांवों में खर्च धनराशि का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा तो कार्यदायी संस्था नहीं दे पाई। इस वजह से संबंधित विभाग कार्य और भुगतान की सत्यापन नहीं कर पाया और पुष्टि न होने पर जांच के घेरे में आ गए। मामलों को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए कमेटी बनाकर जांच शुरू कर दी है।

वहीं, इस क्रम में वर्ष 2020-21 में 17 गांव व वर्ष 2021-22 में 70 गांव और चयनित हुए। इनमें कार्य कराने के लिए बजट मार्च 2025 में मिला। इससे देरी हुई। अब यहां भी कार्य कराये जा रहे हैं। पहले विकास कार्य संस्था ने कराये थे, जिसकी रफ्तार धीमी होने पर ग्राम पंचायतों को दिए गए हैं।

पहले 50 फीसद बाद में 40 अनुसूचित जाति बाहुल्य चुने गए गांव

योजना के तहत पहले 50 फीसद से अधिक अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव व बाद में 40 फीसद से अधिक चयन का मानक तय किया गया। प्रति गांव विकास के लिए दो चरणों में कुल 20 लाख रुपये मिलते हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्र, सोलर व स्ट्रीट लाइट, नाली, ड्रेन, सोकपिट बनाए जाते हैं। पहले सड़क निर्माण और पेयजल संबंधित कार्य शामिल थे। बाद में इन कार्यों की अलग से योजनाएं संचालित होने से हटा दिए गए।

वर्जन

वर्ष 2019-20 में हुए कार्यों के उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं। इस वजह से जांच नहीं कर पाए। जिलाधिकारी द्वारा जांच कराई जा रही है।
- सुनील कुमार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास)

 

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