Gen Z में कैंची धाम की बढ़ती प्रसिद्धि
नैनीताल स्थित बाबा नीम करौली के कैंची धाम की प्रसिद्धि में पिछले कुछ वर्षों में असाधारण वृद्धि हुई है। श्रद्धालुओं के जत्थे पर जत्थे यहां सिर नवाते हुए देखे जा सकते हैं। छुट्टियों में इतनी अधिक भीड़ हो जाती है कि नैनीताल जाने वाली सड़क पर मीलों लंबा जाम लग जाता है। सड़क के दो, कैंची जैसे तीखे मोड़ों पर स्थित होने के कारण इसका नाम कैंची धाम पड़ा।
पर्यटन विभाग के सहयोग से कराए गए एक अध्ययन में पाया गया कि इस धाम में बाबा नीम करौली और उनके द्वारा स्थापित हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं में अधिकांशतः 15 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के युवा हैं। यह कुल आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का लगभग 67 प्रतिशत है। - टि्वंकल तोमर सिंह
कैंची धाम पहुंचने वाली पीढ़ी व पीढ़ी है, जिसे हम जेन-जी के नाम से जानते हैं। रील्स के माध्यम स्वयं को व्यक्त करने वाली, सोशल मीडिया पर अपने छोटे से छोटे अधिकार के लिए आवाज उठाने वाली, तेजी से डिजिटल एक्सपर्ट होने वाली यह पीढ़ी एकाएक इतनी आध्यात्मिक और आस्थावान कैसे हो गई, यह भी शोध का विषय हो सकता है। क्या यह पीढ़ी किसी आध्यात्मिक शांति की तलाश में है? या फिर नीम करौली बाबा में उनकी आस्था को सचमुच में आधार मिला है? या फिर वे किसी चमत्कार की आस में वहां जा रहे हैं?
गौरतलब है कि यह स्थान एप्पल व फेसबुक के संस्थापकों जैसी प्रसिद्ध हस्तियों की यात्राओं के कारण यह स्थान, जिसके बारे में पहले कम ही लोग जानते थे, अब अचानक चर्चित हो गया। कहा जाता है कि एप्पल कंपनी के संस्थापक, स्टीव जॉब्स, 1974 में नीम करोली बाबा से मिलने भारत आए थे। बाबा के निधन के बाद भी वे कुछ दिन आश्रम में रुके थे, जिससे उन्हें आध्यात्मिक प्रेरणा मिली और यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
उनके आशीर्वाद के कारण ही वे एक सफल बिजनेसमैन बन सके। इसी प्रकार यह भी कहा जाता है कि फेसबुक के संस्थापक, मार्क जुकरबर्ग, स्टीव जॉब्स की सलाह पर, फेसबुक के शुरुआती मुश्किल दौर में कैंची धाम आए थे। इस यात्रा से उन्हें नई दिशा मिली और यह उनके जीवन में एक परिवर्तनकारी घटना थी। उसके बाद उनकी सफलता के हम सब साक्षी है।
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या युवा वर्ग में कैंची धाम के प्रति बढ़ता क्रेज वास्तव में बाबा में उनकी श्रद्धा का परिणाम है या फिर वैश्विक स्तर के उनके दो आदर्शों ने उनके मन में यह प्रेरणा भरी है? युवा वर्ग के हृदय में अध्यात्म ने वास्तव में घर कर लिया है या इस लालच ने कि उनके धनी और सफल आदर्शों की तरह ही बाबा के दर्शनों से उनके जीवन में रातोंरात चमत्कार हो जाएगा और वे भी सितारे बन जाएंगे?
अनुसरण उसी का किया जाता है, जिसकी तरह हम बनना चाहते हैं। वास्तव में अनुसरण तो बाबा नीम करौली द्वारा दी गई शिक्षाओं का होना चाहिए था। वे सेवा, त्याग, धर्म, तप के जीती जागती मिसाल थे। ऐसा प्रतीत होता है कि बाबा के द्वार पर सिर नवाकर युवा पीढ़ी यह आशीर्वाद चाहती है कि यू ट्यूब, इंस्टाग्राम पर हमारे मिलियंस फॉलोअर्स हो जाएं, लाखों में हमारी इनसे आय होने लगे, हमारी प्रसिद्धि विश्व के कोने-कोने तक पहुंच जाए। इन्हें संत नहीं, मन की मुराद पूरी करने वाला सांता चाहिए।
