मेरठ : शंकराचार्य से कथित दुर्व्यवहार के विरोध में हिंदू महासभा की बैठक, कार्रवाई की मांग

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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मेरठ। अखिल भारत हिंदू महासभा ने मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में माघ मेला के दौरान जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज और उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से हुए दुर्व्यवहार की घटना के विरोध में मंगलवार को यहां एक बैठक की।

शहर के शारदा रोड स्थित संगठन कार्यालय परिसर में स्थापित अमर हुतात्मा नाथूराम गोडसे-नाना आप्टे धाम पर हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मां गंगा के जल में स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ किया गया व्यवहार अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बावजूद संबंधित किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने इस घटना को उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि धूमिल करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल प्रदेश के मुखिया हैं बल्कि गोरक्षपीठ गोरखपुर जैसे पूज्य मठ के महंत भी हैं और साधु-संतों के सम्मान एवं संरक्षण के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में उनके शासनकाल में किसी भी साधु-संत का अपमान स्वीकार्य नहीं है। 

बैठक के माध्यम से संगठन ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक खुले पत्र के जरिए घटना में शामिल अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और संबंधित अधिकारियों से पूज्य शंकराचार्य सहित सभी साधु-संतों से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया था कि रविवार को पुलिस ने उन्हें और उनके अनुयायियों को गंगा में स्नान करने से रोक दिया था।

घटना के बाद, संत विरोध प्रदर्शन पर बैठ गए और वरिष्ठ अधिकारियों से माफी की मांग की। हालांकि, मेला प्रशासन ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं के लिए बनाए गए पोंटून पुल पर अवरोधकों को तोड़ दिया गया। प्रशासन ने बताया कि किसी भी संत को स्नान करने से नहीं रोका गया था।  

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