स्मार्ट किया मीटर, पोर्टल पर फीडिंग नहीं कराई... गलत बिल के मैसेज से अब उपभोक्ता परेशान

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: सामान्य मीटर हटाकर बिजली विभाग ने स्मार्ट मीटर तो लगा दिए, लेकिन दो हजार उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर की फीडिंग पोर्टल पर नहीं कराई। इससे तीन-चार महीने से इन उपभोक्ताओं का सही बिल नहीं आ रहा है। उपभोक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों के अलावा हेल्प लाइन नंबर 1912 पर भी शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हो सका, उल्टे दिसंबर में फिर गलत बिल के मैसेज भेज दिए गए। परेशान उपभोक्ता उपकेंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।

दरअसल बिजली विभाग ने मीटर लगाने और फीडिंग की जिम्मेदारी एक संस्था को सौंपी है। विभागीय नियमों के अनुसार मीटर बदलने के तुरंत बाद उसकी जानकारी उपभोक्ता प्रबंधन प्रणाली में फीड होना अनिवार्य है। जिससे कि अगली रीडिंग और बिलिंग सही तरीके से हो सके। किंतु कंपनी और लेसा के बीच तालमेल की कमी से फीडिंग नहीं हो पाई है।

इस संबंध में जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वीपी सिंह ने कहा कि, कार्यदायी संस्था को कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं। मीटर बदलने के बाद तुरंत फीडिंग की जानी चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं को समय पर सही बिल मिल सके। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के साथ, लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

महीनों से बिल नहीं, आरडीएफ भेज दिया

वृंदावन योजना निवासी भावना का कनेक्शन नंबर 1986990471 है। उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले मीटर बदला गया था, लेकिन सही बिल जारी नहीं हुआ। खुद रीडिंग लेकर अधिकारियों के पास गई थी, लेकिन सिस्टम में फीडिंग न होने के कारण आरडीएफ का बिल भेज दिया गया। विभाग ने कनेक्शन को प्रीपेड भी बना दिया है।

कई बार कर चुका हूं शिकायत

धेश्याम ने बताया कि कैसरबाग उपकेंद्र के तहत उनका भवन आता है। दो किलोवाट का 7472990021 नंबर से घरेलू कनेक्शन है। 14 सितंबर को मीटर बदले जाने के बावजूद चार महीने बाद भी नया मीटर को पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया। समस्या के बाबत उपकेंद्र और हेल्पलाइन नंबर पर कई बार शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन जरूर मिला, नतीजा कुछ नहीं निकला।

सोलर उपभोक्ता भी परेशान

अलीगंज निवासी डीजे मजूमदार का कनेक्शन नंबर 1842974303 है। उनके पांच किलोवाट के कनेक्शन पर सोलर पैनल लगे हैं। नियमानुसार सोलर मीटर की फीडिंग होना जरुरी है, जिससे एक्सपोर्ट की गई बिजली का सही हिसाब हो सके। पोर्टल पर फीडिंग न होने के कारण हम अभी तक यह नहीं जान पा रहे हैं कि ग्रिड में कितनी यूनिट बिजली भेजी, और उसका कितना लाभ हमें मिला।

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