टैरिफ टेंशन के बीच घटा छोटी युनिट्स में उत्पादन, वैश्विक कारोबारी चुनौतियों के बीच MSME सेक्टर पर पड़ा असर

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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कानपुर, अमृत विचार। वैश्विक बाजार में टैरिफ की टेंशन के बीच अब छोटी यूनिट्स भी प्रभावित होने लगी है। यह वे यूनिट्स है जो निर्यात कारोबार से जुड़ी यूनिट्स में बन रहे प्रोडक्ट में सहयोग करती है। उद्यमियों की माना जाए तो निर्यात कारोबार प्रभावित होन से इनपर भी अब प्रोडक्शन अधिक घटने का खतरा मंडराने लगा है। शहर में एमएसएमई सेक्टर का लगभग 30 फीसदी कारोबार सीधे प्रभावित हुआ है।

अमेरिका की ओर से पहले 50 फीसदी और उसके बाद अधिक टैरिफ लगाए जाने की आशंका से विदेशी खरीदार सतर्क है। वे अब ऑर्डर को होल्ड कर रहे हैं। उनका निर्यातकों से यह कहना है कि टैरिफ पर टेंशन साफ होने के बाद ही ऑर्डर सुचारू रूप से चल सकेंगे। इस वैश्विक बाजार की हलचल से पहले बड़ी निर्यात उत्पाक इकाइयां और अब छोटी सहयोगी इकाइयां भी कम प्रोडक्शन की जद में आ गई हैं। 

सबसे अधिक पैकेजिंग व प्रिंटिंग सेक्टर की इकाइयां प्रभावित हुई है। छोटी युनिट्स में प्रोडक्शन कम होने से अब यहां पर काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियों पर भी खतरा मंडराने लगा है। पूरे मामले पर फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में छोटी युनिट्स में कम प्रोडक्शन तब तक अधिक नहीं होगा जब तक इन्हें बड़ी युनिट्स से ऑर्डर नहीं आएगा। ऐसी स्थिति में यह छोटी युनिट्स अब डोमेस्टिक मार्केट से ऑर्डर हासिल करने की योजना पर काम कर रहीं हैं। 

नए बाजार पर जोर

शहर की 40 फीसदी छोटी औद्योगिक इकाइयां बड़ी निर्यात  इकाइयों पर निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाए जाने के बाद इनके ऑर्डर गिरे थे। बावजूद इसके यह छोटी इकाइयां अपना प्रोडक्शन संभाले हुए थी। सना इंटरनेशनल एक्जिम के निदेशक डॉ जफर नफीस ने बताया कि हालिया दौर में अमेरिका की ओर से विश्व के कई देशों पर टैरिफ लगाए जाने की बात हो रही है। ऐसे में ऐसे निर्यातक जिनका कई देशों से ऑर्डर आता है वहां से भी अब काम धीमा हो गया है। उसका अधिक असर छोटी निर्यात कारोबार से जुड़ी इकाइयों पर पड़ा है।
 

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