जॉब का पहला दिन: ज्वाइनिंग की जद्दोजहद और सीनियरिटी का दौड़

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Published By Anjali Singh
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यूं तो लगभग 23 वर्षों का समय गुजर गया है, किंतु उस समय की कुछ धुंधली यादें आज भी जहन में हैं, जिन्हें आपसे साझा कर रहा हूं। सुबह-सुबह डाकिया महोदय घर आए और उन्होंने नियुक्ति आदेश की प्रति प्राप्त कराई, तो जैसे लगा कि दुनिया की सारी खुशियां मिल गईं। झट से हम भी सीधे सीएमओ कार्यालय गए और वहां से मेडिकल कराया तथा बगल में बीएनएसडी इंटर कालेज, कानपुर नगर गए, जहां से इंटर तक शिक्षा प्राप्त की थी, वहां के प्रधानाचार्य महोदय से चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त किया। 

सारे काम इतनी तेज गति से किए गए कि 11:30 बजे प्रातः ज्वाइनिंग लेने अपर जिलाधिकारी (नगर) के कार्यालय पहुंचे, तो जानकारी दी गई कि वह नहीं हैं, तो अपर जिलाधिकारी (वि/रा) महोदय के कार्यालय पहुंचे और ज्वाइनिंग लेटर के साथ चिकित्सीय प्रमाण-पत्र व चरित्र प्रमाण-पत्र (जैसाकि नियुक्ति आदेश में अंकित था) प्रस्तुत किया। अपर जिलाधिकारी (वि/रा) महिला अधिकारी थीं, उन्होंने घूरते हुए मुझे देखा और कहाकि इतनी जल्दी कैसे करा लाए। उन्होंने प्रस्तुत चरित्र प्रमाण-पत्र मानने से इंकार किया कहा कि मैं इसको नहीं मानती। जिलाधिकारी कार्यालय में ही तैनात श्री बनारसी तिवारी से मेरे पूर्व के गुरु-चेला के संबंध थे, तो उन्होने मेरी मदद की और दो चरित्र प्रमाण-पत्र अन्य अधिकारियों से तत्काल बनवा दिए। 

आधे घंटे के अंदर फिर मैं मैडम के कक्ष में पहुंच गया। मैडम फिर बोलीं मैं ये भी नहीं मानूंगी। मैडम के चैंबर में अन्य लोग भी बैठे थे, उनके सामने मैडम से थोड़ी सी बहस भी हो गई, क्योंकि मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैडम जानबूझकर मुझे ज्वाइन नहीं कराना चाह रही हैं। मैडम भी आगबबूला हो गईं। मैंने फिर कहा कि अब आप जिन अधिकारीगण को बता दें, मैं उनसे ही बनवाकर ले आता हूं। पब्लिक में से कुछ लोग मेरी ओर से बोले कि मैडम इस लड़के ने चार कैरेक्टर दे दिए हैं और कहां से लाएगा। 

मेरी कोशिश थी कि मेरी ज्वाइनिंग उसी दिन हो जाए ताकि सीनियरटी का फायदा मिल जाए। तब मैडम बोलीं अच्छा जाओ दो और बनवाकर ले आओ। अगर 4 बजे तक आ जाओगे तो ज्वाइनिंग दे दूंगी नहीं तो अगले दिन ही ज्वाइन करना। श्री तिवारी जी ने पुनः मेरी मदद की और दो चरित्र प्रमाण-पत्र अपने निकटस्थ अधिकारीगण से बनवा दिए। मैं 3: 00 बजे पुनः मैडम के सामने पेश हो गया और कहाकि आपके कहे अनुसार दो और बनवा लाया हूं। मैंडम ने फिर घूरते हुए मेरे ज्वानिंग लेटर पर अनुमति प्रदान कर दी। 

कुल मिलाकर पहला दिन सिर्फ ज्वाइनिंग की जद्दोजहद में ही निकल गया। ज्वाइनिंग के बाद ऑफिस के वरिष्ठ साथियों से मिला। बाद में ये जानकारी हुयी कि मैडम किसी और की ज्वाइनिंग पहले कराना चाहती थीं ताकि उसे सीनियरटी मिल सके, लेकिन मेरे सतत प्रयास से ऐसा हो न सका। खैर बाद में मैडम ने मेरी लगन और मेहनत को देखते हुए मुझे पूरा सपोर्ट किया और मुझे अपने लड़के की तरह मानने लगीं। इस तरह नौकरी का पहला दिन सिर्फ ज्वाइनिंग की जद्दोजहद में ही निकल गया-नितिन प्रकाश गुप्ता, सरकारी कर्मचारी, कानपुर