मॉय फर्स्ट राइड: सासू मां के साथ मेरी आगे बढ़ने की यात्रा
जीवन में कुछ यात्राएं सड़कों पर तय होती हैं और कुछ हमारे मन और सोच के भीतर। मेरी कार सीखने की यात्रा भी ऐसी ही एक यात्रा रही, जो केवल ड्राइविंग सीखने तक सीमित नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और बदलाव को अपनाने की कहानी बन गई।
2024 में जब मेरी शादी तय हुई, तब तक मैं कार चलाना नहीं जानती थी। मायके में इसकी कभी विशेष आवश्यकता नहीं पड़ी थी, इसलिए यह कौशल मेरे जीवन का हिस्सा नहीं बन पाया, लेकिन शादी के बाद ससुराल का वातावरण अलग था। यहां मेरी सासू मां और ननद दोनों कार चलाती थीं।
घर से जुड़ा अधिकांश काम-चाहे फैक्ट्री जाना हो, कच्चा माल लाना हो या बाजार की खरीदारी-कार से ही पूरा होता था। ऐसे में मुझे यह समझ में आने लगा कि अब मुझे भी इस जिम्मेदारी में हाथ बंटाना होगा।
कार सीखने का निर्णय लेना आसान था, लेकिन उसे सीखने की प्रक्रिया उतनी सरल नहीं थी। पहली बार स्टीयरिंग पकड़ते समय हाथ कांप रहे थे। सड़क पर निकलते ही मन में डर और असमंजस बना रहता था। ब्रेक, एक्सेलरेटर और क्लच के बीच तालमेल बैठाने में समय लगा। कई बार छोटी-छोटी गलतियां हुईं, लेकिन हर बार सासू मां ने धैर्य और अपनापन दिखाया। उनका विश्वास और सहयोग मेरे लिए सबसे बड़ा संबल बना।
धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ा और डर कम होने लगा। सुबह की खाली सड़कों से शुरुआत हुई, फिर मोहल्ले की गलियों से होते हुए मैं मुख्य सड़क तक पहुंच पाई। समय के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। आज मैं अपनी सासू मां के साथ फैक्ट्री के कामों के लिए जाती हूं और बाजार की जिम्मेदारियां भी निभाती हूं। अब कार मेरे लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की पहचान बन गई है।
इस पूरी यात्रा ने मुझे यह सिखाया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। परिस्थितियां जब बदलती हैं, तो हमें भी अपने भीतर बदलाव लाना पड़ता है। परिवार का सहयोग और विश्वास किसी भी नई शुरुआत को आसान बना देता है। सासू मां के साथ मेरा रिश्ता इस दौरान और भी गहरा हुआ, क्योंकि हमने साथ-साथ सीखने और आगे बढ़ने का अनुभव साझा किया।
आज जब मैं कार चलाती हूं, तो मुझे सिर्फ मंजिल तक पहुंचने की जल्दी नहीं होती, बल्कि उस सफर का आनंद भी मिलता है, जिसने मुझे आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनाया। मेरी कार सीखने की यात्रा वास्तव में मेरे नए जीवन की दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण यात्रा बन चुकी है।-अपर्णा, कानपुर
