उत्तर प्रदेश का नया स्वरूपः शक्ति रसोई ने सशक्त किया हजारों महिलाओं का भविष्य, अब पूरे यूपी में बढ़ेगा दायरा

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Published By Muskan Dixit
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40 जिलों में 50 शक्ति रसोई संचालित, तीसरे चरण में नए जिलों में खुलेंगी और रसोइयां

पिछले साल महिला समूहों ने की 4.46 करोड़ रुपये की बिक्री, रोजगार और आत्मनिर्भरता में आई क्रांतिकारी बदलाव

लखनऊ, अमृत विचार : राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) ''शक्ति रसोई'' का दायरा बढ़ाकर डे-एनयूएलएम के महिला स्वयं सहायता समूह को सशक्त और स्वावलंबी बनाएगा। 40 जिलों के शहरी क्षेत्रों में 50 शक्ति रसोई के सफल संचालन पर तीसरे चरण में अन्य जिलों में संचालन की तैयारी है। जहां लोगों को कम कीमत पर स्वच्छ गुणवत्तापूर्ण एवं पोषण युक्त भोजन मिलेगा। रसोई का संचालन करने से समूह की महिला सदस्य रोजगार से जुड़कर आजीविका चलाएंगी।

डे-एनयूएलएम के तहत मार्च 2024 में शहरी क्षेत्रों के सरकारी परिसरों में शक्ति रसोई की शुरुआत हुई थी। लोगों को कम कीमत पर अच्छा खाना मिला तो रसोई की मांग बढ़ती गई। धीरे-धीरे 40 जिलों में 50 रसोई संचालित होने लगी। इससे जुड़ी 204 महिलाएं को रोजगार मिलने लगा। जो 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमाती है। इससे प्रेरित होकर अन्य समूहों ने भी रसोई संचालित करने की मांग की है, जहां तीसरे चरण में सूडा द्वारा रसोई संचालित कराई जाएंगी। शक्ति रसोई में श्री अन्न (मिलेट्स) एवं स्थानीय प्रसिद्ध भोज्य पदार्थ मैन्यू शामिल है।

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पकवान बनाने से लेकर होटल मैनेजमेंट का पाया प्रशिक्षण

इसकी स्थापना में किचन यूटेन्सिल, फर्नीचर, ब्रांडिंग आदि के लिए एक निजी बैंक फाउंडेशन ने सहयोग किया है। साथ ही सदस्यों को प्रतिष्ठित होटलों में प्रसिद्ध मास्टरशेफ द्वारा तरह-तरह के पकवान बनाने और परोसने से लेकर मैनेजमेंट तक का पूरा प्रशिक्षण दिया गया है। अगस्त, 2024 के प्रथम सप्ताह में इन्सटीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेन्ट के माध्यम से भी सघन प्रशिक्षण दिया गया है। मार्च 2024 से जनवरी तक 4,45,99,464 रुपये की बिक्री हुई है।

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मिला रोजगार, आजीविका में आया सुधार

19 फरवरी 2024 को कलेक्ट्रेट परिसर में रसोई संचालित की थी। साथ में सात महिलाएं जुड़ी हैं। अच्छी खासी आमदनी होने से आजीविका में सुधार आया है।

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- कामिनी मिश्रा अध्यक्ष, श्री स्वयं सहायता समूह, लखनऊ

लखनऊ के सूडा भवन मुख्यालय में संचालित शक्ति रसोई ने न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाया है बल्कि समाज में नई पहचान भी दी है। कई महिलाओं को इससे रोजगार मिला है।

- चंदा, कोषाध्यक्ष, उत्थान महिला क्षेत्र स्तरीय समिति, लखनऊ

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