विश्व कैंसर दिवस आज... हर साल होती है 9 लाख मौत, KGMU विशेषज्ञों ने कहा रोकथाम और समय पर पहचान बचा सकती जीवन

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और आईएआरसी के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष दुनिया में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। देश में प्रतिवर्ष 14 से 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं, लगभग 8.5 से 9 लाख मरीजों की मृत्यु हो जाती है। कैंसर का प्रमुख कारण बिना तंबाकू सेवन है। विश्व कैंसर दिवस के एक दिन पूर्व मंगलवार को केजीएमयू के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. वेद प्रकाश ने पत्रकारों से ये जानकारी साझा की।

प्रो. वेद ने बताया कि तंबाकू और शराब के सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और वायु प्रदूषण कैंसर के मुख्य जोखिम कारक हैं। इसके अलावा संक्रमण, जैसे एचपीवी और हेपेटाइटिस बी और सी वायरस भी 15 से 20 प्रतिशत कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा फेफड़े और अन्य अंगों के कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच धूम्रपान, शराब सेवन और असंतुलित जीवनशैली को रोकना सबसे प्रभावी कदम साबित हो सकता है कहा कि समय पर निदान और विशेषज्ञ टीम आधारित उपचार कैंसर से बचाव और बेहतर जीवन की कुंजी हैं। इस मौके पर पद्म श्री प्रो. राजेन्द्र प्रसाद को सम्मानित किया गया।

तंबाकू और पान मसाला की लत युवाओं को बना रही कैंसर का शिकार

शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की ओपीडी में हर चौथा कैंसर मरीज तंबाकू या पान मसाला का उपयोग करने वाला पाया गया है। पीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान और कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में रोजाना करीब 400 नए और पुराने मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें लगभग 30 फीसदी मरीज माउथ कैंसर के होते हैं। इनमें अधिकतर मरीज 30 से 50 साल की उम्र के हैं।

मुंह, गला और फेफड़े के कैंसर में तेजी, विशेषज्ञों ने समय पर स्क्रीनिंग और जागरूकता की अहमियत बताई

कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के रेडियो ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि पिछले एक साल में संस्थान में सात हजार मरीज देखे गए। इनमें औसतन साढ़े तीन हजार मरीज मुंह और गले के कैंसर के थे। अकेले रेडिएशन विभाग की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक मरीज आते हैं, जिनमें लगभग 50 फीसदी मरीज मुंह और गले के कैंसर के होते हैं। पीजीआई के रेडियोथेरेपी विभाग की डॉ. पुनीता लाल ने बताया कि विभाग में रोजाना 100 से ज्यादा मरीज आते हैं, जिनमें नए मरीजों की संख्या औसतन 30 होती है। इनमें से करीब 10 मरीज मुंह और गले के कैंसर के होते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि लगभग 30 फीसदी मरीज आखिरी स्टेज में पहुंचकर आते हैं, जिससे ऑपरेशन या अन्य उपचार करना मुश्किल हो जाता है।

बायोप्सी जांच अहम

लोहिया संस्थान में मेडिकल आंकोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि बायोप्सी जांच कराने में 80 प्रतिशत मरीज कतराते हैं। जबकि बायोप्सी जांच इलाज की दिशा तय करती है। इससे ट्यूमर व कैंसर के प्रकार का पता लगाया जाता है। जिससे सटीक इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।

समय पर इलाज जरूरी

केजीएमयू सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के डॉ. नसीम अख्तर ने बताया कि तंबाकू छोड़ने से इसका जोखिम 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है। और यदि बीमारी शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए, तो 90 प्रतिशत से अधिक मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

डॉ. अर्चना श्रीवास्तव का कहना है कि हमारे शरीर में लगातार एक अदृश्य युद्ध चलता रहता है। फ्री रेडिकल अस्थिर और हानिकारक अणु होते हैं, जो हमारी कोशिकाओं के डीएनए को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं और उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दिशा में ले जा सकते हैं। प्रदूषण, तंबाकू, मानसिक तनाव, असंतुलित आहार और अनियमित जीवनशैली इन खतरनाक अणुओं की संख्या को तेजी से बढ़ा देते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट इस युद्ध में शरीर के सच्चे रक्षक हैं। ये फ्री रेडिकल को निष्क्रिय कर कोशिकाओं की मरम्मत करते हैं और कैंसर का खतरा कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन सी, विटामिन ई, बीटा-कैरोटीन, फ्लैवोनॉयड्स और सेलेनियम जैसे एंटीऑक्सीडेंट हरी सब्ज़ियों, रंग-बिरंगे फलों, साबुत अनाज और प्राकृतिक आहार में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

सकारात्म सोच और इलाज से कैंसर को हराया जा सकता है

लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व कैंसर सर्वाइवर डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने कहा कि कैंसर होने पर खबराने की जरूरत नहीं हैं। सकारात्मक सोच रखें। सामान्य जीवन जिए, इलाज कराने के साथ ही खुद को अपने रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त रखें। भविष्य की चिंता न करें। ऐसे लोगों से दूरी बनाये जो बीमारी को लेकर डर पैदा करें। इससे आप जल्द स्वस्थ होंगे।

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