Bareilly : त्रिवटी नाथ मंदिर की कुर्की के नोटिस पर मचा हड़कंप तो निगम को हुआ गलती का अहसास

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के टैक्स बकाया वसूली को जारी कुर्की नोटिस ने शनिवार को शहर के धार्मिक और प्रशासनिक हल्कों में तूफान ला दिया। सदियों पुराने प्राचीन टिबरीनाथ मंदिर को नगर निगम ने बकायेदारों की सूची में डालकर उसकी चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का नोटिस जारी कर दिया। 

यही नहीं, सीधे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधीन आने वाले पासपोर्ट कार्यालय को भी डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया। अखबारों में प्रकाशित सार्वजनिक नोटिस में पासपोर्ट ऑफिस का नाम उन बकायेदारों के साथ दर्ज था, जिनकी संपत्ति कुर्क की जानी थी। इसे लेकर जब हड़कंप मचा तो अधिकारियों ने सावर्जनिक नोटिस को लेकर सफाई दी कि कुर्की मंदिर-मस्जिद पर नहीं, बल्कि उनके आधिपत्य में आने वाली व्यावसायिक संपत्तियों, दुकानों और किरायेदार भवनों पर की जा रही है।

मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने कहा कि टिबरीनाथ संपत्ति पर 1.82 लाख रुपये, टिबरीनाथ मंदिर परिसर पर 1.76 लाख रुपये और पासपोर्ट कार्यालय 1.73 लाख रुपये बकाया है। नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 तक जिन भवन स्वामियों/अध्यासियों पर संपत्ति कर बकाया है, उन्हें धारा 504 के अंतर्गत बिल और धारा 506 के तहत मांग नोटिस भेजे गए थे। बावजूद भुगतान नहीं होने पर धारा 507, 508, 509, 510 व 513 के प्रावधानों के अनुसार चल-अचल संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई प्रस्तावित है। 

इसी के लिए 30 जनवरी को बकायेदारों की सूची प्रकाशन को भेजी गई थी। इधर, कहा जा रहा है कि निगम की यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक अज्ञानता का उदाहरण है, बल्कि संवेदनशीलता और जनभावना की अनदेखी का भी प्रमाण है। लोगों का कहना है कि मंदिर और धार्मिक स्थलों के प्रति जनता की आस्था को ध्यान में रखे बिना उठाया गया यह कदम निश्चित रूप से आलोचना का पात्र है। इसके अलावा, पासपोर्ट कार्यालय जैसी सरकारी संस्थाओं को भी डिफॉल्टर घोषित कर देने का साहस सीधे तौर पर निगम की प्रशासनिक विवेकहीनता को दर्शाता है।


मंदिर और संपत्ति पर अलग-अलग टैक्स का जाल
नगर निगम ने सदियों पुराने टिबरीनाथ मंदिर पर करोड़ों का बकाया दो हिस्सों में दिखा दिया। टिबरीनाथ संपत्ति पर 1,82,181.52 और मुख्य मंदिर पर 1,76,874.93 का बकाया निकाला, जबकि पासपोर्ट कार्यालय पर 1,73,437.02 की देनदारी घोषित की गई। भक्तों में भारी गुस्सा इसको लेकर है कि नगर निगम के अधिकारी धर्मस्थलों को श्रद्धा और आस्था की दृष्टि से नहीं, बल्कि केवल ''प्रॉपर्टी'' की तरह आंक रहे हैं। यह अज्ञानता और संवेदनहीनता न केवल प्रशासनिक विवेकहीनता को उजागर करती है, बल्कि जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने के बराबर है। सवाल उठता है कि क्या निगम को मंदिर और सरकारी संस्थानों में फर्क फर्क करने की समझ ही नहीं?

फ्रिज, एसी और बैंक खाते होंगे सीज
नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तीन दिनों के भीतर टैक्स जमा नहीं किया गया, तो धारा 507 से 513 के तहत मंदिर से लेकर विदेश मंत्रालय के अधीन आने वाले पासपोर्ट कार्यालय तक की संपत्तियों पर कार्रवाई होगी। जारी नोटिस में साफ लिखा गया है कि मोटर कार, फ्रिज, एसी, कूलर, कंप्यूटर और यहां तक कि बैंक खाते भी कुर्क किए जा सकते हैं।

समिति ने किया स्पष्ट, किरायेदार जिम्मेदार, समिति नहीं
अखबारों में नगर निगम की ओर से प्रकाशित कर मंदिर का कर बकाया और देनदारों में मन्दिर का नाम प्रकाशित किये जाने पर बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर सेवा समिति ने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में किरायेदार-स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और दुकानदारों की सभी सरकारी, नगर निगम ,बिजली आदि कर या बाकाया राशि सीधे संबंधित विभाग को देंगे। मंदिर सेवा समिति का इस पर कोई दायित्व नहीं है। समिति का संचालन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार होता है। 

मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने यह बयान जनता और प्रशासन को भरोसा दिलाने के लिए जारी किया। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि धार्मिक स्थलों की कुर्की नहीं की जा रही है। कार्रवाई केवल उन व्यावसायिक संपत्तियों पर हो रही है जो मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आधिपत्य में आती हैं और जिनका टैक्स बकाया है। इसी कारण से कुर्की नोटिस प्रकाशित किया गया था।

 

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