नई कार स्टेटस देती  पुरानी कार समझदारी

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Published By Anjali Singh
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कार खरीदना कुछ लोगों के लिए बुनियादी जरूरत है, तो कुछ लोगों के लिए शानो-शौकत और रुतबे का प्रतीक, लेकिन हम में से अधिकांश लोगों के लिए यह हमेशा से एक सपने के सच होने जैसा है। कार आज हम सभी के घरों का एक जरूरी और अहम हिस्सा बन चुकी है। इस मांग की वजह से ही हाल के वर्षों में पुरानी कारें खरीदने का चलन तेजी से बढ़ा है और देश में पुरानी कारों का बाजार एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। यह तब हुआ है, जब लोगों को भरोसा हुआ है कि पुरानी कारें भी नई कारों जितनी ही अच्छी हो सकती हैं।

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एक और वजह यह भी है कि पसंदीदा नई कारें आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं, ऐसे में कम बजट में बेहतर ब्रांड, शानदार फीचर्स की उपलब्धता भी पुरानी कारों की मांग को शहरों से लेकर कस्बों तक आगे बढ़ा रही है। हालांकि काफी सारे लोग पुरानी कार खरीदने में जोखिम और धोखाधड़ी के कारण बचते हैं, लेकिन पुरानी कारों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आने के बाद से चीजें काफी आसान भी हो गई हैं।-मनोज त्रिपाठी, कानपुर

 पुरानी कारों की बिक्री नई कारों से ज्यादा

भारत में पुरानी कारों की बिक्री नई कारों की तुलना में 8 से 10 फीसदी सालाना वृद्धि दर से बढ़ रही है। वर्तमान में प्रत्येक नई कार की बिक्री पर लगभग 1.4 पुरानी कारें बेची जा रही हैं। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार साल 2026 के अंत तक भारत में इस्तेमाल की गई कारों की बिक्री 75 लाख यूनिट्स तक पहुंचने का अनुमान है। यही नहीं इस साल देश में पुरानी कारों का बाजार 3.4 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि पुरानी कारों के बाजार में हिस्सेदारी की बात करें, तो अभी भी सिक्का स्थानीय डीलरों और ब्रोकर का चलता है, जो बाजार के लगभग 68 फीसदी हिस्से पर काबिज हैं, लेकिन ग्राहकों का भरोसा अब वारंटी और सर्टिफाइड कारों के कारण तेजी से संगठित क्षेत्र की ओर शिफ्ट हो रहा है। इस बदलाव से डिजिटल माध्यमों से होने वाली पुरानी कारों की बिक्री की हिस्सेदारी इस साल के अंत तक करीब 30 फीसदी पहुंचने की उम्मीद है।

मारुति, टाटा, महिंद्रा के साथ ऑनलाइन स्टार्टअप्स ने जीता यूज्ड कार का भरोसा

पुरानी कारों के संगठित कारोबार में मारुति सुजुकी True Value, महिंद्रा First Choice और टाटा मोटर्स Assured जैसे निर्माताओं के साथ Cars24, Spinny, CarDekho और Droom जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ और भी अनेक ऑनलाइन स्टार्टअप्स शामिल हैं। ये सभी सर्टिफाइड गाड़ियां खोजने, टेस्ट ड्राइव बुक करने और पूरी लेनदेन प्रक्रिया में मदद के अलावा अधिकतर कार के मूल्यांकन और कागजी कार्रवाई में भी सहायता प्रदान करते हैं, जिससे पुरानी कार खरीदना आसान हो जाता है।

इनमें Cars24 को पुरानी कारों की खरीद-बिक्री के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें आप कार का मूल्यांकन, टेस्ट ड्राइव और पूरी कागजी कार्रवाई जैसे आरसी ट्रांसफर, लोन आदि में मदद पा सकते हैं। Spinny भी एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है, जो सर्टिफाइड और अच्छी क्वॉलिटी वाली पुरानी कारों को आसान और सुरक्षित तरीके से खरीदने का बेहतर अनुभव प्रदान कर रहा है।

CarDekho पुरानी और नई दोनों तरह की कारों की पूरी जानकारी जैसे मॉडल, कीमत और माइलेज जैसी डिटेल्स प्रदान करता है। इसके मुकाबले Droom ऑनलाइन मार्केट प्लेस है, जहां आप विभिन्न कारों की तुलना कर सकते हैं और कई विकल्प देख सकते हैं। इसी कड़ी में CarWale भी एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है, जहां आपको पुरानी और नई कारों के ढेर सारे विकल्प मिलते हैं। इनके अतिरिक्त OLX भी पुरानी कारें खरीदने और बेचने के लिए लोकप्रिय ऐप है, जिसमें आप सीधे विक्रेता से संपर्क कर सकते हैं।

इसलिए बढ़ रहा है पुरानी कारों का बाजार

देश में हर साल लाखों लोग पहली बार कार खरीदते हैं और उनमें से बड़ी संख्या सेकेंड हैंड या यूज्ड कार को प्राथमिकता देती है। इसके पीछे कारण हैं-

    नई कारों की बढ़ती कीमतें
    कम डाउन पेमेंट और आसान फाइनेंस
    डिप्रीसिएशन का कम झटका
    ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती 

विश्वसनीयता

    सर्टिफाइड प्री-ओन्ड कार प्रोग्राम्स

इन कारों की मांग सबसे अधिक

बाजार के ट्रेंड पर नजर डालें, तो हैचबैक मारुति स्विफ्ट, वैगनआर, ग्रैंड आई-10 और सेडान में होंडा सिटी, मारुति सियाज, इसी तरह एसयूवी में क्रेटा, ब्रेजा, डस्टर आदि 5 से 7 साल पुरानी, कम चली और अच्छी तरह मेंटेंड कारें सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं।

खरीदने से पहले जरूरी बातें 

    सबसे पहले अपना बजट बनाएं,फिर यह देखें कि पुरानी कार फर्स्ट हैंड है या फिर उसके पहले भी कई ऑनर रह चुके हैं। ऐसी कार लेना हमेशा बेहतर होता है, जो कम किलोमीटर चली हो। भारत में, एक कार औसतन सालाना 6 हजार से 12 हजार किलोमीटर चलती है। यह जरूरी है कि आप सर्विस रिकॉर्ड और गाड़ी की पूरी स्थिति के अनुसार चलाए गए किलोमीटर की जांच करें। 
    आरसी, इंश्योरेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की जांच करें। ओडोमीटर रीडिंग और सर्विस हिस्ट्री मिलाएं। कार को दिन की रोशनी में ध्यान से देखें।
    टेस्ट ड्राइव जरूर लें, आवाज, ब्रेक, गियर पर ध्यान दें। किसी अच्छे मेकैनिक से पूरा इंस्पेक्शन करवा लें। इंश्योरेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया ठीक से समझें।

ऑनलाइन या ऑफलाइन कहां से खरीदें

    ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: ज्यादा विकल्प, पारदर्शी कीमत
    डीलरशिप: भरोसेमंद लेकिन कीमत थोड़ी ज्यादा
    डायरेक्ट ऑनर: सस्ता सौदा, पर जोखिम ज्यादा