बजट 2026 : किसान बोले...एआई बाद में, पहले खाद‑बीज और फसलों के सही दाम मिलें
बरेली, अमृत विचार। केंद्रीय बजट को किसान और किसान संगठनों ने निराशाजनक बताया है। उनका कहना कि बजट में स्वास्थ्य और कुछ टेक्नोलॉजी पर फोकस ठीक है, लेकिन खेती‑किसानी के मुद्दों को पूरी तरह नजरंदाज किया गया है। एआई टूल और डिजिटल सलाह की घोषणाओं को लेकर कहा कि उन्हें एआई का मतलब तक ठीक से नहीं पता।
हम तो मौसम विभाग की सूचना और अपने अनुभव से खेती करते आए हैं. एआई टूल क्या है, कैसे काम करेगा, गांव में कौन समझाएगा ये भी स्पष्ट करना चाहिए। महंगे कृषि उपकरणों पर भारी टैक्स, फसल बीमा और एमएसपी पर कोई ठोस प्रावधान न होना और कर्ज माफी की अनदेखी ने निराशा और बढ़ा दी है। बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने का प्रावधान तक नहीं किया गया। जबकि किसानों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं। किसान नेताओं ने इस बजट को ''आंकड़ों और घोषणाओं का बजट'' करार दिया और साफ तौर पर कहा कि देश के मेहनतकश अन्नदाताओं और ग्रामीणों की अपेक्षाओं को नजरअंदाज करना विकास की गति को कमजोर करेगा।
प्रगतिशील किसान विजय चौहान ने बताया कि बजट में खेती और किसानों की बुनियादी जरूरतों जैसे खाद, बीज और कृषि उपकरणों पर कोई राहत नहीं दी गई। महंगी मशीनरी और बढ़ती लागत किसानों की जेब पर भारी पड़ रही है। फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई ठोस घोषणा न होना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरना है । सरकार को चाहिए कि वह अन्नदाता और ग्रामीणों को केंद्र में रखकर बजट में वास्तविक राहत और समर्थन की व्यवस्था करे।
भाकियू (अराजनैतिक) मंडल अध्यक्ष अरुण राठी ने बताया कि कृषि क्षेत्र में बजट पूरी तरह आंकड़ों और घोषणाओं तक सिमट गया है। एआई और डिजिटल टूल की बातें अच्छी हैं, लेकिन हम जमीन पर खेती करते हैं। खाद और बीज की सही कीमत, कर्ज माफी और एमएसपी पर गारंटी किसानों के लिए जरूरी थी। आम किसान इन घोषणाओं से लाभ नहीं उठा पाएगा। सरकार को बजट में गांव और मेहनतकश किसान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
किसान नेता उपदेश सिंह बजट में खेती-किसानी के लिए कोई ठोस कदम नहीं दिखा। यह बजट जमीनी सच्चाइयों से दूर, आंकड़ों और घोषणाओं का बजट है, जिसमें देश के अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग की अपेक्षाओं की अनदेखी की गई है। सरकार को चाहिए कि वह किसान, मजदूर और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर अपनी नीतियों और बजटीय प्रावधानों पर पुनर्विचार करे।
किसान जागन लाल मौर्य ने बताया कि हमारे लिए बजट निराशाजनक रहा। महंगी खेती, बढ़ते खर्च और महंगे बीज-खाद ने पहले ही परेशान किया था। एआई टूल और डिजिटल सलाह हमारे लिए समझ से बाहर हैं। अगर सरकार खाद और बीज सस्ते करे, कर्ज माफ करे और एमएसपी की गारंटी दे, तो हम राहत महसूस कर पाएंगे। आम किसान को असली मदद वही है, जो सीधे खेत और जेब पर असर डाले।
