कालीन उद्योग की नई उड़ान...ट्रंप के टैरिफ कम करने पर खिला भदोही का बाजार, निर्यात में भारी उछाल की उम्मीद
भदोही। यूरोपीय यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) के बाद अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने को विकसित भारत मिशन-2047 की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालिया ट्रेड डील से विशेष रूप से भारतीय कालीन उद्योग में उत्साह का माहौल है। निर्यातकों का मानना है कि इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन में और अधिक मजबूत व विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरेगा।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने बताया कि वैश्विक कंपनियां चीन के विकल्प की तलाश में हैं और भारत अपनी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजनाओं, मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा युवा कार्यबल के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कालीन निर्यात का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका को जाता है, ऐसे में टैरिफ में कमी उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईयू और अमेरिका के साथ हुए समझौतों से बने सकारात्मक माहौल के चलते भारतीय कालीनों का निर्यात वर्तमान 14,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 18,000 से 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। निर्यातकों के अनुसार यह समझौता उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई मजबूती प्रदान करेगा।
