केंद्रीय बजट पर बोले मंत्री धर्मपाल सिंह- UP में पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के बजट में तीन गुना बढ़ोतरी

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन से जुड़ी योजनाओं का बजट 2017-18 के 1,37,423.53 लाख से बढ़ाकर 2024-25 में 4,11,529.86 लाख (करीब तीन गुना बढ़ोतरी) किया गया है। इसके अलावा लाभार्थीपरक योजनाओं (बकरी, भेड़, सूकर व बैकयार्ड कुक्कुट पालन) के लिए अनुदान भी 2021-22 के 6.02 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 22.45 करोड़ किया गया है। 

मंगलवार को विधानभवन स्थित तिलक हाल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश दुग्ध उत्पादन में 15.66 प्रतिशत योगदान के साथ देश मे पहले स्थान पर है। जबकि दुग्ध उत्पादन 2017-18 में 290.52 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 388.15 लाख मीट्रिक टन हो चुका (करीब 33 प्रतिशत वृद्धि) है। इसके अलावा अंडा उत्पादन में 244 करोड़ से बढ़कर 611 करोड़ पहुंच गया है। 

धर्मपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ पशुपालन की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। प्रदेश में पशुजन्य उत्पादों का सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 के 0.99 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 1.72 लाख करोड़ पहुंच गया है यानी 8.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 

उन्होंने बताया कि 20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार, प्रदेश में 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 144.80 लाख बकरी, 9.85 लाख भेड़ और 4.09 लाख सूकर मौजूद हैं, जो पशुधन संपदा की व्यापकता दर्शाता है। धर्मपाल सिंह ने कहा कि नस्ल सुधार कार्यक्रमों का असर उत्पादकता में दिख रहा है। 

विदेशी संकर व देसी गायों की औसत दुग्ध उत्पादकता 2017-18 की तुलना में 2024-25 में बढ़कर क्रमशः 9.16 और 4.18 किग्रा प्रतिदिन हो गई है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। भैंसों की उत्पादकता भी 4.49 से बढ़कर 5.83 किग्रा प्रतिदिन पहुंची। उन्होंने कहा कि पशुधन मृत्यु दर घटाने के लिए प्रदेश में 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट टोल-फ्री 1962 के जरिए पशुपालकों के द्वार तक सेवाएं दे रही हैं। 

साथ ही पशुधन बीमा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। जबकि निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति के तहत 7,497 गो-आश्रय स्थलों (439 वृहद केंद्र सहित) में वर्तमान में 12.38 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। उनके भरण-पोषण हेतु सहायता राशि 30 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन की गई है। 

इसके अलावा ऊन उत्पादन बढ़ाने के लिए 37 भेड़-बहुल जिलों में पायलट परियोजना चलाई जा रही है, जिसके तहत 2023-24 में 395.40 लाख खर्च किए गए और वैज्ञानिक पद्धति से भेड़-बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए लक्ष्य तय किए गए हैं। जिसमे दुग्ध उत्पादन 447.83 लाख मीट्रिक टन, अंडा उत्पादन 7,980.52 मिलियन और ऊन उत्पादन 8.49 लाख किलोग्राम का लक्ष्य रखा गया है। 

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