Bank Strike Today: बैंककर्मियों की हड़ताल से लखनऊ में 2500 करोड़ की क्लियरिंग प्रभावित

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को हुई राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का असर लखनऊ में भी व्यापक रूप से देखने को मिला। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 905 शाखाओं के कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से शहर में 2500 करोड़ रुपये की क्लियरिंग प्रभावित होने की संभावना जताई गई है।

इसी क्रम में लखनऊ के इंडियन बैंक, हजरतगंज पर बैंककर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि हड़ताल से पहले बैंककर्मियों ने कई चरणों में धरना-प्रदर्शन, रैली और सोशल मीडिया अभियान चलाया, लेकिन केंद्र सरकार उनकी एकमात्र मांग पर विचार को तैयार नहीं है।

सभा को संबोधित करते हुए एनसीबीई के महामंत्री कॉमरेड डी.के. सिंह ने कहा कि जब रिजर्व बैंक, एलआईसी, सेबी, नाबार्ड, एनपीसीआई और अनेक सरकारी विभागों में पांच कार्यदिवस लागू हो सकते हैं तो बैंकों में क्यों नहीं। कॉमरेड आर.एन. शुक्ला ने कहा कि कर्मचारी माह के शेष शनिवारों के अवकाश के बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को भी तैयार हैं।

कॉमरेड एस.के. संगतानी ने सरकार की हठधर्मिता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) बैंककर्मियों की मांग स्वीकार कर सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेज चुका है, बावजूद इसके अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान कॉमरेड मनमोहन दास ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग कोई भीख नहीं बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है, जिसके लिए लंबी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। सभा को लक्ष्मण सिंह, शकील अहमद, संदीप सिंह, वी.के. माथुर, बी.डी. पांडे, एस.डी. मिश्रा, विभाकर कुशवाहा, आनंद सिंह, विशाखा वर्मा और स्वाति सिंह सहित कई बैंक नेताओं ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि हड़ताल से आमजन को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि हड़ताल के चलते लखनऊ में बैंकिंग सेवाएं लगभग ठप रहीं और व्यापक स्तर पर लेन-देन प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि हड़ताल के चलते लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 905 शाखाओं के करीब 16 हजार कर्मचारी एवं अधिकारी हड़ताल पर रहे। अनुमान के अनुसार शहर में लगभग 2500 करोड़ रुपये की क्लियरिंग प्रभावित हुई। 

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