विश्व कैंसर दिवस : लाइफ स्टाइल में बदलाव और रेगुलर एक्सरसाइज ही कैंसर से बचाव-डॉ अर्जुन

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। लाइफ स्टाइल में बदलाव और रेगुलर एक्सरसाइज करने से कैंसर से बचाव किया जा सकता है। खानपान बेहतर रखने के साथ रेगुलर एक्सरसाइज करने से शरीर में अच्छे हार्मोंस पैदा होते हैं, जो कैंसर सेल को शरीर में एक्टिव होने से रोकने का कार्य करते हैं। 

40 वर्ष की आयु के बाद सभी महिलाओं को स्तन कैंसर के लिए वार्षिक मैमोग्राफी और हर तीन साल में पैप स्मीयर परीक्षण कराना चाहिए। प्रत्येक पुरुष को प्रोस्टेट कैंसर के लिए हर तीन साल में सीरम पीएसए परीक्षण कराना चाहिए, ताकि यह मालूम हो सके कि शरीर के किसी हिस्से में कैंसर के सेल तो एक्टिव नहीं हो रहे हैं। यह कहना है कि रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं एमसीएच (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. अर्जुन अग्रवाल का।

अमृत विचार से हुई बातचीत में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने बताया कि 70 प्रतिशत कैंसर का इलाज लाइफ स्टाइल में बदलाव और बेहतर डॉक्टर की सलाह से ली जा रही दवाइयों से संभव है। वह कहते हैं कि कैंसर सेल कहीं बाहर से शरीर में प्रवेश नहीं करते हैं। ये हमारे शरीर के अंदर ही होते हैं, जो हमारे बिगड़े खानपान, तंबाकू और बीड़ी-सिगरेट और कई अन्य कारणों से शरीर में एक्टिव हो जाते हैं। कैंसर का एक सेल दो, चार फिर 16 होते ही तेज गति से शरीर में फैलने लगते हैं।

डॉ. अर्जुन का कहना है कि शरीर में कैंसर के जो एक्टिव सेल हैं उन्हें खत्म करने के लिए समय पर इलाज जरूरी है। प्रथम और सेकेंड स्टेज में कैंसर को 90 या 100 प्रतिशत तक ठीक किया जा सकता है, लेकिन यदि थर्ड और फोर्थ स्टेज में कैंसर पहुंच गया तो रोगी को ठीक होने में काफी समय लग सकता है। कैंसर विशेषज्ञ का कहना है कि 90 प्रतिशत कैंसर का लाइफ स्टाइल से संबंध है। हैबिट्स, तंबाकू व बीड़ी से कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है। मुंह का कैंसर कॉमन है।

ज्यादातर लोगों में तंबाकू ही कैंसर की वजह बनता है। यूपी में इसका प्रभाव सबसे ज्यादा है। दूसरी वजह स्मोकिंग में बीड़ी व सिगरेट है। आजकल इसका प्रचलन ज्यादा है, इससे मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, बड़ी आंत का कैंसर, बच्चेदानी में कैंसर, खाने की नली का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना ज्यादा रहती है। तीसरा कारण डाइट है, हम लोगों को शुद्ध खाना खाने को नहीं मिल पाता है, पेस्टीसाइड, रसायन युक्त चीजें ज्यादा हैं। बोतल बंद पानी के दौरान माइक्रो प्लास्टिक हमारे अंदर चले जाते हैं, पर्यावरण प्रदूषण भी कैंसर का कारण बनता है। चौथा मोटापा है लेकिन एक्सरसाइज से कुछ अच्छे हार्मोंस जन्म लेते हैं, जो कैंसर सेल को पनपने से रोकते हैं।
ये हैं कैंसर के लक्षण

- डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने बताया कि कैंसर होने के कई लक्षण हैं। पहला लक्षण वेट लॉस है। किसी पुरुष या महिला में छह से 12 महीने में पांच प्रतिशत या उससे अधिक वेट लॉस होता है तो यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। दूसरा लक्षण लगातार थकान होना है। तीसरा लक्षण मुंह, नाक, थूक, बच्चेदानी, लैट्रिंग के रास्ते खून आना है। चौथा लक्षण पीलिया और पांचवां लक्षण शरीर में किसी भी जगह पानी एकत्र होना है। ऐसी स्थिति में कैंसर का चेकअप कराना चाहिए।

कैंसर के इलाज में 100 साल में काफी कुछ हुआ बदलाव
कैंसर के इलाज पर फोकस करते हुए डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने बताया कि अब कैंसर को आधुनिक इलाज से मात दी जा रही है। कैंसर के इलाज में 100 साल में काफी कुछ बदलाव हुआ है। पहले के समय में एक मेजर सर्जरी होती थी, अब रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी आने के बाद कैंसर को हराना और आसान हो गया है। इम्यूनोथेरेपी भी इसमें शामिल है। यह ऐसा ट्रीटमेंट है, शरीर के जिस हिस्से में कैंसर पनपता है, उसी हिस्से की निगरानी कर वहीं पर कैंसर के सेल्स को खत्म करने का प्रयास किया जाता है। इम्यूनोथेरेपी आधुनिक कैंसर उपचार है, जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्मून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने के लिए सशक्त बनाता है। यह पारंपरिक कीमोथेरेपी से भिन्न है, अक्सर कम साइड इफेक्ट्स के साथ बेहतर परिणाम देता।

बचाव रखने के लिए ये बदलाव जरूरी
कैंसर विशेषज्ञ ने कैंसर से बचाव रखने के लिए कई बातें बतायी हैं। उनका कहना है कि 90 प्रतिशत कैंसर लाइफ स्टाइल से संबंधित हैं, हमें तंबाकू व सिगरेट छोड़ना चाहिए। हमें अच्छा खाना चाहिए, नियमित एक्सरसाइज करने की जरूरत हैं, ताकि हार्मोंस ज्यादा पैदा होते रहे, स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए, योग करना चाहिए। प्रतिदिन इतनी एक्सरसाइज करनी चाहिए ताकि खूब पसीना बाहर आ सके।

क्या है मैमोग्राफी
मैमोग्राफी स्तन कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए की जाने वाली एक कम-खुराक (लो-डोज) वाली एक्स-रे जांच है, जिसे मैमोग्राम कहते हैं। यह प्रक्रिया स्तन की गांठों, असामान्य ऊतकों या सूक्ष्म कैल्शियम जमाव को ढूंढती है, जब वे इतने छोटे होते हैं कि उन्हें महसूस नहीं किया जा सकता।
क्या है कैंसर स्क्रीनिंग

कैंसर स्क्रीनिंग ऐसा टेस्ट है, जो किसी व्यक्ति में कैंसर के कोई लक्षण दिखने से पहले ही उसके संकेतों या प्री-कैंसरस (कैंसर-पूर्व) बदलावों का पता लगाती है, जिससे शुरुआती चरण में ही बीमारी का पता चल सके, जब इलाज आसान और प्रभावी होता है तो कुछ मामलों में कैंसर को बढ़ने से रोका भी जा सकता है।

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