Bareilly: कैंसर को मात देने वाले मरीज अब फैला रहे जागरूकता
बरेली, अमृत विचार। कैंसर को हराकर बेहतर जीवन जीने वाले वैसे तो हजारों लोग हैं, लेकिन विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर हम आपको कुछ मरीजों से रूबरू करा रहे हैं जिन्होंने डेढ़ से दो साल में कैंसर को मात दी और अब लोगों में कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता फैला रहे हैं।
अमरजीत ने डेढ़ साल के उपचार में सर्विक्स कैंसर को दी मात
उत्तराखंड के बाजपुर की अमरजीत कौर (63 वर्ष) को वर्ष 2013 में पेट दर्द की तकलीफ हुई। बेटे मंजीत सिंह ने उन्हें बाजपुर में स्थानीय चिकित्सक को दिखाया। अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टर की सलाह पर जांच करायी। इसमें अमरजीत कौर को सर्विक्स कैंसर का पता चला। करीब डेढ़ वर्ष उपचार के बाद अमरजीत कौर ने कैंसर पर जीत हासिल की।
हफीज को हुआ था गले का कैंसर, अब पूरी तरह स्वस्थ
शहर के मोहनपुर निवासी हफीज अहमद (65 वर्ष) को 2015 में गले का कैंसर हुआ। कई जगह दिखाने के बाद हफीज अहमद डाॅ. पियूष से मिले और इलाज आरंभ हुआ। करीब ढाई वर्ष इलाज के बाद हफीज अहमद पूरी तरह कैंसर मुक्त हुए। अब हफीज रिश्तेदारों और संबंधियों को कैंसर के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
कमला को हुआ था ओवरी कैंसर, इलाज के बाद मिली निजात
पीलीभीत के गांव सिमायरा गौसिया निवासी कमला देवी (46 वर्ष) को वर्ष 2015 में पेट में गैस की समस्या हुई। पीलीभीत में स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने पेट का आपरेशन कर गांठ निकाली। जांच में कैंसर के लक्षण मिले। इसके बाद जांच में कमला को ओवरी कैंसर का पता चला। कैंसर से मुक्त होकर कमला लोगों को जागरूक कर रही हैं।
मधु ने खाने की नली के कैंसर को हराया
हरदोई की मधु (66 वर्ष) को वर्ष 2015 में खाना खाने में दिक्कत होने लगी, इस पर उनके पति मदन गोपाल ने चिकित्सक से सलाह ली। मधु की जांच रिपोर्ट में उन्हें खाने की नली में कैंसर होने का पता चला। छह महीने उपचार के बाद मधु स्वस्थ हुईं और उन्होंने खाना आरंभ कर दिया है।
महेश चंद्रा को हुआ गले का कैंसर, इलाज से पूरी तरह हुए स्वस्थ
बदायूं के महेश चंद्रा (63 वर्ष) के गले में गांठ थी। वर्ष 2015 में उसमें से खून आना आरंभ हुआ। स्थानीय चिकित्सक से की सलाह पर महेश चंद्रा ने बायोप्सी कराई, जिसमें गले के कैंसर होने की जानकारी मिली। करीब एक वर्ष उपचार के बाद महेश चंद्र पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
रामवती ने लड़कर ब्रेस्ट कैंसर को किया पराजित
इज्जतनगर स्थित रोड नंबर एक निवासी रामवती (60 वर्ष) के ब्रेस्ट में गांठ थी। धीरे-धीरे दर्द होने लगा। परेशान होकर उनके परिजनों ने डॉक्टर को दिखाया। जांच में ब्रेस्ट कैंसर की जानकारी हुई। करीब डेढ़ वर्ष इलाज के बाद रामवती को ब्रेस्ट कैंसर से निजात मिली। परिवार के साथ रामवती कैंसर के मरीजों को जागरूक करती हैं।
