खेतों की मिट्टी बीमार, आम के बाग बचाए जान...किसान ऐसे करें इससे बचाव, एक्सपर्ट से जानें उपाय
लखनऊ, अमृत विचार : प्राकृतिक खेती छोड़कर रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और फसल चक्र टूटने से खेतों की मिट्टी कमजोर हो रही है। आम बेल्ट को छोड़ दिया जाए तो अन्य क्षेत्रों के खेतों की मिट्टी में ''जान'' यानी जीवांश कार्बन है ही नहीं। इससे मिट्टी में जीवाणु नहीं पनप रहे हैं। इसके बगैर पोषक तत्वों की पूर्ति भी नहीं हो रही है। इस वजह से फसलों का उत्पादन और उत्पादकता भी गिर रही है। यह हकीकत 2025-26 में कराए गए मृदा परीक्षण की रिपोर्ट बता रही है।
जिले में इस वर्ष रबी में 16 हजार मिट्टी के सैंपल यानी मृदा परीक्षण का लक्ष्य रखा गया। इसमें 15,600 सैंपल कृषि विभाग ने एकत्र करके अलीगंज स्थित क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में भेजे। इनमें करीब 14 हजार का परीक्षण किया गया। 92 फीसद सैंपलों में नाइट्रोजन लो मिला। जोकि पोषक तत्वों की पूर्ति करता है।
इसी तरह 65 फीसद सैंपलों में फास्फोरस और 54 फीसद सैंपलों में पोटाश मध्यम मिला। जबकि सबसे मुख्य 27 फीसद मिट्टी के सैंपलों जीवांश कार्बन लो पाया गया और 58 फीसद सैंपलों में मध्यम निकला। जीवांश कार्बन कम होना बेहद खराब स्थिति के संकेत हैं।
इसके बिना खेती लायक मिट्टी नहीं बनती है न ही पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। खासबात यह है कि मलिहाबाद व माल आम की बेल्ट क्षेत्र में जीवांश कार्बन की मात्रा सही पाई गई है। विशेषज्ञाें के मुताबिक आम के पेड़ों से गिरी पत्तियां जीवांश कार्बन बनाती है। इसका असर आसपास के खेतों पर होता है। इसलिए वहां की वहां की मिट्टी स्थिति ठीक है।
लखनऊ से लगे जिलों की स्थिति भी मृदा परीक्षण में इसी तरह आई है। मृदा परीक्षण में जीवांश कार्बन कम निकला है। परीक्षण के आधार पर किसानों को रिपोर्ट कार्ड दिए हैं। इससे वह पूर्ति करेंगे। आम बेल्ट से लगे खेतों की स्थिति ठीक है। किसानों को जागरूक व प्रोत्साहित कर रहे हैं।- डॉ मन मोहन लाल, सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण/कल्चर)
