यूजीसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश लोकतंत्र की जीत : अलंकार अग्निहोत्री
एटा/हाथरस। सरकार की नीतियों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में हाल ही में इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा यूजीसी मामले में अपनाए गए रुख का स्वागत करते हुए इसे ''लोकतंत्र और राष्ट्र की आत्मा की जीत'' करार दिया।
अग्निहोत्री ने सरकार की नीतियों और यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए गत सोमवार को इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उनका इस्तीफा नामंजूर करते हुए उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। अग्निहोत्री ने हाथरस में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन लोकतंत्र और राष्ट्र की आत्मा की जीत का प्रतीक है। यह जीत न्यायपालिका के माध्यम से मिली है।
उच्चतम न्यायालय ने यूजीसी के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए।
उधर, अग्निहोत्री ने एटा के शहीद पार्क इलाके में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि उनके फैसले सिद्धांतों पर आधारित थे, न कि व्यक्तिगत विचारों पर। अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की तैयारी चल रही है मगर वह जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे।
अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पुलिस से हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ किया गया दुर्व्यवहार सनातनधर्मियों का गंभीर अपमान है। घटना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या ऐसा व्यवहार सामाजिक रूप से स्वीकार्य होगा।
विवाद के घेरे में आए यूजीसी के नए नियमों का जिक्र करते हुए अग्निहोत्री ने उन्हें भेदभावपूर्ण बताया और कहा कि इन नियमों के तहत तो सामान्य श्रेणी के लोग पहले ही अपराधी ठहरा दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सांसदों को कानूनी प्रावधानों का बुनियादी ज्ञान नहीं है। अग्निहोत्री ने दावा किया कि संसद और राज्य विधानसभाओं में अक्सर पर्याप्त बहस के बिना कानून पारित किए जाते हैं।
उन्होंने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को एक ''कॉर्पोरेट इकाई'' की तरह काम करने वाला दल बताया और सभी समुदायों के लोगों से कानून के खिलाफ एकजुट होने और अपने प्रतिनिधियों से जवाब मांगने की अपील की। अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या कोई पार्टी बनाने का इरादा नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ब्राह्मण और सामान्य श्रेणी के संगठनों ने समर्थन दिया है।
