खोज: गर्म हवा के गुब्बारे की खोज
मानव की उड़ने की इच्छा जितनी पुरानी है, उतनी ही रोमांचक है गर्म हवा के गुब्बारे की कहानी। इस सपने को पहली बार वास्तविकता में बदलने का श्रेय 18वीं शताब्दी के फ्रांस के दो भाइयों- जोसेफ और एटियेन मोंटगोल्फियर को जाता है। कागज बनाने के व्यवसाय से जुड़े ये भाई आकाश में उड़ते बादलों और धुएं को देखकर अक्सर सोचते थे कि क्या हवा की मदद से कोई वस्तु ऊपर उठ सकती है।
एक दिन जोजेफ ने आग के ऊपर उठते धुएं को देखा और महसूस किया कि गर्म हवा में कोई “उठाने की शक्ति” है। इसी विचार ने उन्हें प्रयोग के लिए प्रेरित किया। 1783 में उन्होंने कागज और कपड़े से बना एक बड़ा थैला तैयार किया और उसके नीचे आग जलाकर उसमें गर्म हवा भरी। आश्चर्यजनक रूप से वह गुब्बारा ऊपर उठ गया। यह मानव इतिहास में पहली सफल गर्म हवा के गुब्बारे की उड़ान थी।
बाद में, इसी वर्ष पेरिस में एक और ऐतिहासिक प्रयोग किया गया, जिसमें पहले जानवरों और फिर मनुष्यों को गुब्बारे में बैठाकर उड़ाया गया। यह घटना आधुनिक विमानन की नींव मानी जाती है।इस आविष्कार के पीछे का विज्ञान सरल, लेकिन प्रभावशाली है। गर्म हवा ठंडी हवा की तुलना में हल्की होती है। जब गुब्बारे के अंदर की हवा गर्म की जाती है, तो उसका घनत्व कम हो जाता है। बाहर की ठंडी और भारी हवा गुब्बारे को ऊपर की ओर धकेलती है। यही सिद्धांत उत्थापन बल (Buoyancy) कहलाता है। जब तक गुब्बारे के अंदर की हवा आसपास की हवा से हल्की रहती है, तब तक गुब्बारा आकाश में तैरता रहता है। गर्म हवा का गुब्बारा केवल एक आविष्कार नहीं था, बल्कि यह मानव जिज्ञासा, प्रयोगशीलता और विज्ञान की शक्ति का प्रतीक बना। इसने यह सिद्ध कर दिया कि कल्पना और विज्ञान मिलकर असंभव को भी संभव बना सकते हैं।
वैज्ञानिक के बारे में
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जोसेफ और एटियेन मोंटगोल्फियर फ्रांस के अन्नोने (Annonay) नगर में जन्मे थे और एक काग़ज़ निर्माण करने वाले प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखते थे। जोसेफ-मिशेल (1740-1810) स्वभाव से कल्पनाशील, जिज्ञासु और प्रयोगप्रिय थे। उन्हें प्राकृतिक घटनाओं को देखकर नए विचार सूझते थे। इसके विपरीत जैक्स-एटियेन (1745-1799) अधिक व्यावहारिक, अनुशासित और व्यवस्थित व्यक्तित्व के थे। उन्होंने परिवार के व्यवसाय और सार्वजनिक संबंधों को संभाला।
