जब कण टकराते हैं, तब खुलते हैं ब्रह्मांड के राज
हिग्स बोसोन की खोज लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) के पहले रन में दर्ज किए गए कोलिजन डेटा से संभव हुई थी, जो 2009 के अंत से 2012 के अंत तक चला। इस खोज ने स्टैंडर्ड मॉडल के अंतिम अधूरे हिस्से को पूरा किया, लेकिन साथ ही कई नए सवाल भी खड़े कर दिए। 2015 के वसंत में व्यापक मेंटेनेंस के बाद LHC को अधिक ऊर्जा पर दोबारा शुरू किया गया। दूसरा रन इस मायने में निर्णायक है कि वह हमें हिग्स बोसोन को गहराई से समझने और स्टैंडर्ड मॉडल से आगे की भौतिकी की खोज करने का अवसर देता है।-रणबीर सिंह

कोलिजन की क्वांटम प्रकृति
प्रोटॉन टकराव पूरी तरह प्रेडिक्टेबल नहीं होते। क्वांटम मैकेनिक्स के अनुसार, हर कोलिजन केवल संभावनाओं का समूह होता है। स्टैंडर्ड मॉडल यह बता सकता है कि औसतन कौन‑सी प्रक्रिया कितनी बार होगी, लेकिन किसी एक टकराव का परिणाम पहले से तय नहीं किया जा सकता। इसलिए दुर्लभ प्रक्रियाओं को देखने के लिए बहुत अधिक संख्या में कोलिजन आवश्यक होते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे पासे की निष्पक्षता जांचने के लिए उसे बार‑बार फेंकना पड़ता है।
हिग्स बोसोन: डिके और मास मैकेनिज़्म
हिग्स बोसोन का महत्व इस बात में है कि वही अन्य कणों को द्रव्यमान देता है। कोलिजन में बनने के तुरंत बाद हिग्स विभिन्न कणों में डिके हो जाता है। इसके डिके चैनलों की दरें संबंधित कणों के द्रव्यमान पर निर्भर करती हैं। अब तक हिग्स के फोटॉन, W और Z बोसोन में डिके स्पष्ट रूप से देखे जा चुके हैं, जबकि फ़र्मियॉन में मुख्यतः ताऊ लेप्टन और आंशिक रूप से बॉटम क्वार्क के प्रमाण मिले हैं। दूसरे रन का अधिक डेटा इन मापों को कहीं अधिक सटीक बना सकता है।
हिग्स की अन्य विशेषताएं
दूसरे रन से हम यह भी जानना चाहेंगे कि हिग्स कितनी तेजी से डिके करता है, क्या वह वास्तव में एक फंडामेंटल कण है या उसके भीतर कोई सब‑स्ट्रक्चर छिपा है और क्या हिग्स स्वयं से इंटरैक्ट करता है। हिग्स का self‑interaction सीधे इस बात से जुड़ा है कि वह स्वयं अपना द्रव्यमान कैसे प्राप्त करता है। साथ ही यह संभावना भी खुली है कि एक से अधिक, भारी हिग्स बोसोन मौजूद हों।
उच्च ऊर्जा और नए कणों की संभावना
दूसरे रन में टकराव की ऊर्जा पहले से अधिक है। इसका अर्थ है कि अब अधिक भारी और अब तक अनदेखे कण बनाए जा सकते हैं। उच्च ऊर्जा पर बेहतर रिजॉल्यूशन मिलता है, जिससे कणों और बलों को और बारीकी से समझा जा सकता है। यही कारण है कि भले ही स्टैंडर्ड मॉडल काफी सफल दिखता हो, वैज्ञानिक यह मानते हैं कि वह अंतिम सिद्धांत नहीं हो सकता।
स्टैंडर्ड मॉडल की सीमाएं
स्टैंडर्ड मॉडल की सबसे बड़ी सीमा यह है कि उसमें गुरुत्वाकर्षण शामिल नहीं है। गुरुत्वाकर्षण को जनरल रिलेटिविटी समझाती है, जो क्वांटम सिद्धांत से अलग ढांचे में खड़ी है। इसके अलावा स्टैंडर्ड मॉडल में कई पैरामीटर और कण संरचनाएं मनमानी प्रतीत होती हैं, जैसे बोसॉन और फर्मियॉन का असंतुलन। ये संकेत देते हैं कि किसी अधिक व्यापक सिद्धांत की आवश्यकता है।
सुपरसिमेट्री: एक संभावित विस्तार
स्टैंडर्ड मॉडल का एक लोकप्रिय विस्तार सुपरसिमेट्री है। यह प्रत्येक बोसॉन के लिए एक फर्मियॉन पार्टनर और प्रत्येक फर्मियॉन के लिए एक बोसॉन पार्टनर प्रस्तावित करती है। इससे हिग्स, W और Z बोसोन के अपेक्षाकृत छोटे द्रव्यमान की व्याख्या संभव होती है। सुपरसिमेट्री कई नए कणों और अतिरिक्त हिग्स बोसोन की भविष्यवाणी करती है, जिनकी खोज दूसरे रन का एक बड़ा लक्ष्य है।
LHC के प्रमुख डिटेक्टर
LHC में चार मुख्य डिटेक्टर हैं। ATLAS और CMS जनरल‑पर्पस डिटेक्टर हैं और इन्हीं ने हिग्स बोसोन की खोज की थी। ALICE को भारी आयनों के टकराव के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि क्वार्क‑ग्लूऑन प्लाज्मा और शुरुआती ब्रह्मांड जैसी स्थितियों का अध्ययन हो सके। LHCb बॉटम क्वार्क के डिके का अध्ययन करता है, जो दुर्लभ प्रक्रियाओं और नई भौतिकी के संकेत दे सकते हैं।
मैटर-एंटीमैटर असमानता और डार्क मैटर
LHCb के प्रयोग CP‑वायलेशन के अध्ययन के जरिए यह समझने की कोशिश करते हैं कि ब्रह्मांड में मैटर क्यों बचा और एंटीमैटर क्यों नहीं। दूसरी ओर, डार्क मैटर की समस्या भी स्टैंडर्ड मॉडल से बाहर जाती है। ब्रह्मांड के अधिकांश द्रव्यमान का निर्माण ऐसे कणों से हुआ है, जिन्हें हम अभी नहीं जानते। कई सिद्धांत मानते हैं कि डार्क मैटर कण हिग्स क्षेत्र से द्रव्यमान प्राप्त करते हैं, इसलिए हिग्स का विस्तृत अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आगे का रास्ता
LHC का दूसरा रन केवल पहले रन की पुष्टि नहीं है, बल्कि नई खोजों का द्वार है। चाहे वह हिग्स की गहरी समझ हो, सुपरसिमेट्री की खोज, डार्क मैटर के संकेत या मैटर‑एंटीमैटर असमानता की व्याख्या- दूसरा रन हमें यह जानने के और करीब लाता है कि ब्रह्मांड किससे और कैसे बना है।
