SGPGI में क्लीनिकल एआई का नया युग... स्वास्थ्य सेवा को बनाया जाएगा सुरक्षित और कारगर, तकनीक-नैतिकता और नीति का अनोखा समन्वय
लखनऊ, अमृत विचार : संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के हेपेटोलॉजी विभाग के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार को टेलीमेडिसिन सभागार में क्लीनिकल एआई को कारगर बनाना: प्रौद्योगिकी, अभ्यास और नीति का समन्वय विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस आयोजन में आईसीएमआर-एनआईआरडीएचडीएस और मीमांसा एआई ने सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. अमित गोयल और प्रो. आरके सिंह ने किया। मुख्य भाषण स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. निगम एच. शाह ने दिया। उद्घाटन समारोह में प्रो. आरके धीमन, डॉ. मोना दुग्गल, डॉ. हरीश कार्निक और डॉ. विनीत कंसल ने भाग लिया।
संगोष्ठी में स्वास्थ्य सेवा में एआई के सुरक्षित और प्रभावी समावेशन, नैदानिक कार्यप्रवाह में एआई का एकीकरण, डेटा प्रबंधन, नैतिक और कानूनी पहलुओं तथा जिम्मेदार नवाचार पर विस्तार से चर्चा हुई। पैनल चर्चाओं और केस स्टडीज के माध्यम से वास्तविक दुनिया के अनुभव साझा किए गए।
प्रो. अमित गोयल ने बताया स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित, प्रभावी और समान उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एसजीपीजीआई, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), आईआईटी कानपुर और आईईटी लखनऊ के बीच एक समझौता ज्ञापन प्रक्रियाधीन है। इसका उद्देश्य शोध प्रयोगशालाओं में विकसित एआई तकनीकों को वास्तविक मरीजों तक सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ पहुंचाना है।
