पाइप लाइन में योजनाएं,जाम से कराह रहा शहर... प्रभारी मंत्री ने विधान भवन के सामने से बड़े वाहनों पर प्रतिबंध का दिया था निर्देश
लखनऊ, अमृत विचार: बढ़ती वाहनों की संख्या और बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था के चलते राजधानी जाम से कराह रही है। हालत ये है कि पैदल राहगीरों तक का निकलना मुश्किल हो जाता है। हजरतगंज, सप्रू मार्ग, मेफेयर, बर्लिंग्टन, नगर निगम के आसपास का इलाका, अमीनाबाद, आलमबाग, चारबाग, रकाबगंज, पांडयेगंज, कैसरबाग, बलरामपुर, केजीएमयू, चौक या फिर नक्खास, नादान महल रोड समेत सभी चौराहों और मुख्य मार्गों पर लगभग रोज जाम लगता है। कुछ मिनटों का रास्ता घंटे में तय होता है। अस्पतालों के पास गंभीर मरीजों को लेकर आ-जा रही एंबुलेंस फंसना रोज की बात है। जाम से निपटने के लिए शासन, पुलिस विभाग व यातायात पुलिस ने कई योजनाएं तैयार की हैं, लेकिन ये योजनाएं अभी पाइप लाइन में हैं। यो योजनाएं जब तक लागू होंगी तब तक तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे।
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जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधान भवन के गेट नंबर- 7 व 8 के सामने सुबह 9 बजे से रात बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे। इसके पीछे विधानभवन में ट्रैफिक का अत्यधिक दबाव रहने की बात कही। कहा कि इससे आम लोगों और जनप्रतिनिधियों को भी आवागमन में कठिनाई होती है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि अन्य जिलों से भी रोजाना बड़ी संख्या में वाहन लखनऊ आते हैं, इससे भी वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। इसे देखते हुए सभी प्रमुख चौराहों का संबंधित अधिकारी स्थलीय निरीक्षण करें और आवश्यकतानुसार ट्रैफिक डायवर्जन, बैरिकेडिंग और वन-वे व्यवस्था लागू करें। उन्होंने कहा कि जाम से मुक्ति के लिए कमेटी गठित किया जाए। इसमें यातायात पुलिस, एलडीए, नगर निगम के अधिकारियों को शामिल किया जाए। जो जाम वाले स्थानों का निरीक्षण कर वहां स्थिति के अनुसार समाधान तैयार करें।
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कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मॉनिटर होगा ट्रैफिक
यातायात निदेशालय ने बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना शुरू कर दी है। यह केंद्र पुलिस मुख्यालय (सिग्नेचर बिल्डिंग) में बनाया जा रहा है। जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसका शुभारंभ किया जाएगा। एडीजी यातायात बीडी पॉल्सन के मुताबिक इस सेंटर को प्रदेश के बड़े शहरों के इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) से जोड़ा जा रहा है। गूगल मैप के माध्यम से जाम वाले इलाकों की पहचान कर तुरंत स्थानीय यातायात पुलिस को सूचना दी जाएगी। साथ ही मुख्यालय स्तर से जाम खत्म करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। जुटाये गये डाटा का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि किस सड़क पर किस समय जाम लगता है। इससे जाम के कारणों का पता लगाकर स्थायी समाधान तैयार किया जाएगा। अगले चरण में अन्य शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों को भी इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
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16 यातायात थाने बनाने की भी तैयारी
डीसीपी यातायात कमलेश दीक्षित ने बताया कि विस्तृत अध्ययन के आधार पर 16 ट्रैफिक थाने खोलने का प्रस्ताव निदेशालय भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। थाने उन रूटों पर बनाए जाएंगे जहां जाम व हादसे सबसे अधिक होते हैं। आगरा एक्सप्रेसवे, कानपुर हाईवे, सुल्तानपुर हाईवे, अयोध्या, रायबरेली और सीतापुर हाईवे को प्राथमिकता दी जाएगी। थाने स्थापित करने के बाद यातायात नियंत्रण के लिए समर्पित पुलिस बल तैनात होगा। ट्रैफिक थानों के बनने से हाईवे और शहर के अंदर दोनों जगह हादसों पर अंकुश लगेगा। हादसे होने पर पुलिस की पहुंच घटनास्थल तक तेज होगी, जिससे राहत और बचाव कार्य में सुधार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, ट्रैफिक प्लान और नए ट्रैफिक थाने प्रभावी ढंग से लागू किए गए, तो राजधानी लखनऊ को जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इससे यातायात सुगम होगा और सड़क हादसों में भी कमी आएगी।
