Bareilly: डिजिटल शिक्षा और नवाचार का दौर शुरू, 100 करोड़ से संवर रहा विवि परिसर
बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत मिले 100 करोड़ रुपये के अनुदान से विश्वविद्यालय के विकास को नई गति दी जा रही है। मौजूदा वर्ष संस्थान के लिए परिवर्तनकारी माना जा रहा है। इसमें आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था और वैश्विक स्तर की सुविधाओं के निर्माण पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इससे विश्वविद्यालय न केवल तकनीकी रूप से मजबूत होगा, बल्कि छात्रों, शोधार्थियों और नौकरीपेशा युवाओं के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा के नए रास्ते खुलेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुदान में मिली धनराशि से तीन बड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इन्हें इस वर्ष धरातल पर उतारने की योजना है। इनमें डिजिटल लर्निंग हब, इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी और अंतर्राष्ट्रीय ट्रांजिट छात्रावास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिये शिक्षा के साथ-साथ शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग को भी मजबूती मिलेगी। सबसे प्रमुख परियोजना डिजिटल लर्निंग हब होगी, जो ई-कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन कोर्सेज और हाइब्रिड लर्निंग के लिए वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यूजीसी से 11 नए पाठ्यक्रमों को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। इससे छात्रों को आधुनिक विषयों पर पढ़ाई का अवसर मिलेगा। शिक्षक भी ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को पढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और इंटरएक्टिव बनेगी।
विश्वविद्यालय में ये सुविधाएं मिलेंगी
इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी विश्वविद्यालय में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देगी। यहां विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को अपने नवाचार और व्यावसायिक विचारों को वास्तविक रूप देने के लिए तकनीक, प्रशिक्षण और बुनियादी सहायता प्रदान की जाएगी। विद्यार्थी छोटे स्तर पर उत्पादन से लेकर मार्केटिंग और ब्रांडिंग तक की व्यावहारिक जानकारी हासिल कर सकेंगे, जिससे आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन के नए अवसर खुलेंगे। विदेशी छात्रों और शोधार्थियों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला ट्रांजिट छात्रावास भी बनाया जाएगा। यह छात्रावास विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगा और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा। इससे विश्वविद्यालय की ग्लोबल रैंकिंग और शैक्षणिक प्रतिष्ठा में भी सुधार होने की उम्मीद है। विकास कार्यों की इसी कड़ी में विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार स्वर्ण जयंती द्वार भी बनकर लगभग तैयार हो चुका है और अपने अंतिम चरण में है। यह द्वार परिसर की सुरक्षा, सौंदर्य और आधुनिक पहचान को मजबूत करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि पीएम-उषा के तहत मिला अनुदान संस्थान को डिजिटल और वैश्विक शिक्षा के नए युग में प्रवेश दिलाने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
मीडिया प्रभारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय डॉ. विनय वर्मा ने बताया कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर निरंतर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2026 में इंटरनेशनल ट्रांजिट छात्रावास, डिजिटल लर्निंग हब और इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी का निर्माण किया जा रहा। इसकी नई सुविधाओं में आधुनिक तकनीक, लर्निंग आदि के माध्यम विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान की जाएगी।
