UP: शहर को सिंगापुर बनाने का सपना अधूरा, वार्डों को मिलीं दस-दस लाइटें

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। दिवाली से पहले शहर को सिंगापुर बनाने का जो शोर मचा था, वह खोखले वादों की फाइल में दफन होता दिख रहा है। मेयर डॉ. उमेश गौतम ने 30 सितंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों के वार्डों में अंधेरा रहने की शिकायत पर हर वार्ड में 25-25 स्ट्रीट लाइटें लगाने की घोषणा कर दिवाली से पहले शहर को रोशनी से नहलाने का बात कही था।

इस घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद थी कि त्योहारों से पहले शहर की तस्वीर बदलेगी, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी जमीनी सच्चाई निराशाजनक है। अधिकांश वार्डों को केवल दस से पंद्रह लाइटें दी गईं, जबकि कई वार्ड ऐसे हैं जिन्हें महज पांच लाइटों पर ही संतोष करना पड़ा। इससे न सिर्फ मेयर के दावों पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि निगम की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ गई है।

शहर में कुल 80 वार्ड हैं और हर वार्ड में प्रमुख सड़कों से लेकर गलियों तक रोशनी की मांग लंबे समय से उठती रही है। हर साल करीब आठ करोड़ रुपये प्रकाश विभाग पर खर्च होने के बाद भी हालात जस के तस हैं। कम लाइटें मिलने का सीधा असर आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। महिलाएं, बुजुर्ग और राहगीर अंधेरी सड़कों से गुजरने को मजबूर हैं। पार्षदों का आरोप है कि 25 लाइटों की घोषणा सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित रही, जबकि वितरण के समय प्रकाश विभाग ने मनमानी कर दी।

विपक्षी पार्षदों ने जनभावनाओं से खिलवाड़ बताते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावे तो कर दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें पूरा नहीं किया जाता। वहीं, आम नागरिकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो सिंगापुर बनाना तो दूर, शहर को सुरक्षित और रोशन रखना भी निगम के बस की बात नहीं रह जाएगी।

मेयर की फटकार भी नहीं रोक सकी अभियंता की मनमानी
दिसंबर में पुनरीक्षित बजट की बैठक में स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा उठने पर मेयर डॉ. उमेश गौतम ने प्रकाश विभाग के अधीक्षक और जलकल के सहायक अभियंता अजीत कुमार को फटकार लगाई थी। पार्षदों ने लाइट वितरण में भेदभाव और घोटाले के आरोप लगाए, लेकिन अभियंता बस ''''हां में हां'''' करते नजर आए। वार्डों को बराबर लाइटें देने की चेतावनी के बावजूद अभियंता का रवैया नहीं बदला।

वार्ड-35 के पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि 30 सितंबर को बोर्ड बैठक में 25-25 स्ट्रीट लाइटों की घोषणा हुई थी, लेकिन हमारे वार्ड में सिर्फ 10 लाइटें दी गईं। गलियों में आज भी अंधेरा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हालात नहीं बदले। यह हाल तब है जब प्रकाश विभाग हर साल करीब आठ करोड़ खर्च करता है।

वार्ड-61 के पार्षद कपिल कांत ने बताया कि मैं तो साफ कहता हूं कि यह सीधा जनता के साथ धोखा है। जब मेयर ने खुद सदन में घोषणा की थी तो फिर आधी-अधूरी व्यवस्था क्यों की गई। प्रकाश विभाग ने मनमानी करते हुए लाइटों का बंटवारा किया है। हमारे वार्ड में पहले दस और दो दिन पहले पांच लाइटें और मिलीं। 

नेता सपा पार्षद दल गौरव सक्सेना ने बताया कि हिंदुओं के मुख्य त्योहार दीपावली पर सभी वार्डों में 25 नई लाइट लगाने का वायदा किया गया था, लेकिन केवल 10 लगवाई गयीं और पुनरीक्षित बजट की बैठक में एक माह के अंदर सभी वार्डों में कुल 50 लाइट लगने का भी जो वादा किया गया था वह भी हवाई साबित हुआ। 

वार्ड -7 के पार्षद सुमित के मुताबिक दिवाली से पहले बोर्ड बैठक में 25 और इसके बाद दिसंबर माह में हुई पुनरीक्षित बजट में एक महीने में 50 स्ट्रीट लाइटें प्रत्येक वार्ड को देने की बात की थीं। मेयर ने खुद सदन में घोषणा की थी। हमारे वार्ड को सिर्फ 15 लाइटें मिलीं। इनमें पांच लाइटें एक्सचेंज में मिली हैं। 

 

 

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