वर्ड स्मिथ: कैसे बना शैंपू शब्द

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Published By Anjali Singh
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आज शैंपू हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक सामान्य शब्द बन चुका है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका जन्म भारत में हुआ और यह शब्द हिंदी-उर्दू नहीं, बल्कि संस्कृत मूल से होकर अंग्रेजी तक पहुंचा। ‘शैंपू’ शब्द की कहानी औपनिवेशिक भारत, आयुर्वेद और पश्चिमी संस्कृति के आपसी संपर्क से जुड़ी है। ‘शैंपू’ शब्द की जड़ संस्कृत के शब्द ‘चम्पू’ (Champu) में मिलती है। 

‘चम्पू’ का अर्थ होता है-दबाना, मलना या मालिश करना। प्राचीन भारत में सिर और शरीर की तेल मालिश को ‘चम्पू’ कहा जाता था। यह केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा था। आयुर्वेद में सिर की मालिश को तनाव दूर करने, रक्तसंचार बढ़ाने और बालों को स्वस्थ रखने का प्रभावी उपाय माना गया है।

17वीं-18वीं शताब्दी में जब ब्रिटिश व्यापारी और अधिकारी भारत आए, तो उन्होंने यहां की मालिश और स्नान पद्धतियों को देखा। बंगाल में ‘चम्पू’ एक प्रचलित प्रक्रिया थी, जिसमें जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक तत्वों से सिर की सफाई और मालिश की जाती थी। अंग्रेजों ने इस शब्द को अपने उच्चारण के अनुसार ‘Shampoo’ कहना शुरू कर दिया। 

सन 1762 में यह शब्द पहली बार अंग्रेजी शब्दकोश में दर्ज हुआ। शुरुआत में ‘शैंपू’ का अर्थ केवल सिर की मालिश या शरीर को मलने की क्रिया था, न कि किसी तरल पदार्थ का नाम। बाद में, 19 वीं शताब्दी में जब तरल साबुन और बाल धोने वाले उत्पाद विकसित हुए, तब इस प्रक्रिया से जुड़े उत्पाद को ही ‘शैंपू’ कहा जाने लगा। इस प्रकार, ‘शैंपू’ केवल एक कॉस्मेटिक उत्पाद नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की देन है, जो संस्कृत से चलकर औपनिवेशिक रास्तों से होती हुई पूरी दुनिया की भाषाओं में शामिल हो गई। यह शब्द हमें याद दिलाता है कि भारतीय परंपराओं का वैश्विक प्रभाव कितना गहरा और स्थायी रहा है।

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