मंगलवार को लगेगा वर्ष का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना 3 मार्च को होगी, जो भारत से देखी जा सकेगी

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Published By Deepak Mishra
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नैनीताल, अमृत विचार। मंगलवार 17 फरवरी को लगने जा रहा वर्ष का पहला सूर्यग्रहण रिंग ऑफ फायर यानि वलयाकार होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका के ऊपर दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण नहीं देखा जा सकेगा। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत से देखा जा सकेगा। यह वलयाकार सूर्यग्रहण दक्षिणी गोलार्ध में लगने जा रहा है। जिसका पाथ अंटार्कटिका से होकर जाएगा। इसका पाथ बहुत संकरा है, जो  लगभग 616 किमी चौड़ी पट्टी का होगा, जबकि इसकी लंबाई में 4282 किमी का क्षेत्र कवर करेगा। 

भारतीय समयानुसार दोपहर 3.26 बजे सूर्यग्रहण लगना शुरू होगा। इस ग्रहण में सूर्य का सिर्फ बीच का हिस्सा ग्रहण की चपेट में आता है, जबकि किनारे ग्रहण से मुक्त रहते है। जिसके चलते यह आग का छल्ला जैसा दिखाई देता है। देखने में ग्रहण का यह दृश्य मनमोहक लगता है।  चंद्रमा और सूर्य के बीच की दूरी अधिक होने के कारण वलयाकार सूर्य ग्रहण होता है, जबकि पूर्ण सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूरज को पूरी तरह ढक लेता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण की अवधि दो मिनट की रहेगी। इसके बाद आंशिक ग्रहण बना रहेगा।

भारतीय समयानुसार ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3.26 बजे होगी। शाम 5:42 बजे ग्रहण मध्यस्था में होगा। शाम 7.57 बजे सूर्य ग्रहण के साए से मुक्त हो जाएगा। भारत में सूर्य नीचे होने के कारण ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। इसके बाद चंद्र ग्रहण तीन मार्च को लगने जा रहा, हो भारत से देखा जा सकेगा। 

मनमोहक होगा नजारा 

नैनीताल: आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पूर्व निदेशक डॉ. वहाबउद्दीन के अनुसार ग्रहण की घटना अद्भुत होती है। वलयाकार सूर्य ग्रहण मनमोहक होता है, जबकि पूर्ण सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण होता है, जिसमें सूरज के कोरोना को देखा जा सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण होता है।

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