संपादकीय: महत्वाकांक्षी बजट
उत्तर प्रदेश सरकार का तकरीबन सवा नौ लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट संकेत देता है कि सरकार राज्य को ‘ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य पर अग्रसर है। बजट में बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक निवेश पर विशेष जोर है। एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर और औद्योगिक पार्क जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रावधान प्रशंसनीय हैं। इससे निवेश आकर्षित होगा और दीर्घकाल में रोजगार सृजन की संभावना बढ़ेगी। पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाएं क्षेत्रीय असमानता कम करेंगी।
सरकार ने कौशल विकास, स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाओं के लिए बजट बढ़ाया है, हालांकि प्रत्यक्ष सरकारी नौकरियों की बड़ी घोषणाएं सीमित हैं। रोजगार सृजन का भरोसा मुख्यतः निजी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर आधारित है। चुनावी वर्ष की आहट को देखते हुए युवाओं के लिए लक्ष्य आधारित कार्यक्रम स्वागत योग्य हैं, लेकिन उनकी ठोस समय सीमा और निगरानी तंत्र भी स्पष्ट होना चाहिए। सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण, मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने और डिजिटल शिक्षा पर खर्च बढ़ाने से मानव संसाधन विकास को बल मिलेगा। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी पार्क और अनुसंधान केंद्रों के लिए प्रावधान यह संकेत देते हैं कि राज्य तकनीक आधारित विकास मॉडल अपनाना चाहता है।
शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को वेतन या स्थायीकरण संबंधी कोई स्पष्ट राहत न मिलना असंतोष का कारण बन सकता है। यह वर्ग लंबे समय से नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग कर रहा है। कृषि बजट में सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की घोषणाओं से उत्पादकता और लागत संतुलन में मदद मिल सकती है, किसानों को तकनीक आधारित सेवाओं और कृषि स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलना दीर्घकालीन सुधार का संकेत है, पर एमएसपी, गन्ना भुगतान या कृषि ऋण राहत जैसे मुद्दों पर कोई बड़ा और नया एलान भी अपेक्षित था।
विधवा, वृद्ध और दिव्यांग पेंशन योजनाएं जारी हैं, परंतु वृद्धावस्था पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी न होना महंगाई के परिप्रेक्ष्य में निराशाजनक माना जा सकता है। सामाजिक सुरक्षा का दायरा विस्तारित हुआ है, पर राशि में बड़े इजाफे की उम्मीद पूरी नहीं हुई। 8वें वेतनमान की घोषणा न होना यह दर्शाता है कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहती है। वेतन व्यय पहले ही बजट का बड़ा हिस्सा लेता है, संभव है कि इस पर निर्णय केंद्र के संकेतों के बाद लिया जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश परियोजनाओं में पिछली घोषणाओं का बड़ा हिस्सा लागू हुआ है, फिर भी कई सामाजिक योजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन अभी मूल्यांकन मांगता है। संभव है कि वर्ष के मध्य में अनुपूरक बजट आए, जिसमें छूटे क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए जाएं। इस बजट में आम नागरिक को बेहतर सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार अवसर के रूप में अप्रत्यक्ष लाभ की उम्मीद है। मध्यम वर्ग को बुनियादी सेवाओं के विस्तार से फायदा होगा, पर तात्कालिक आर्थिक राहत सीमित दिखती है।
