प्रधानमंत्री मोदी बोले- बजट में लोकलुभावन उपायों से परहेज, पूंजीगत व्यय से रोजगार सृजन, वृद्धि पर ध्यान
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्पादक व्यय को अपनी सरकार की पहचान बताते हुए रविवार को कहा कि हाल ही में पेश केंद्रीय बजट में जानबूझकर अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों से बचते हुए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय के जरिये बुनियादी ढांचे में निवेश किया गया है ताकि रोजगार सृजन और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि को गति दी जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष साक्षात्कार में कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा छोड़े गए 'संरचनात्मक अंतराल' को पाटने, साहसिक सुधार करने और विकसित भारत की नींव रखने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि ताजा बजट इस यात्रा का 'अगला स्तर' है। उन्होंने एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को अपनी शासन-शैली का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि यह दस्तावेज 'हमारी शासन-शैली और प्राथमिकताओं का अच्छा प्रतिबिंब है।' प्रधानमंत्री ने कहा, ''यह बजट हमारी इस यात्रा का अगला स्तर दर्शाता है और हमारी 'सुधार एक्सप्रेस' को गति देता है। इसे तेजी से बदलती दुनिया में उभरते अवसरों के लिए हमारे युवाओं को तैयार करने और विकास की रफ्तार तेज करने के उद्देश्य से बनाया गया है।''
उन्होंने बजट से पहले पेश 2025-26 की आर्थिक समीक्षा का हवाला देते हुए कहा कि पूंजी संचय, श्रम को संगठित दायरे में लाने और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने मिलकर भारत की संभावित वृद्धि दर को सात प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''उत्पादक व्यय हमारी सरकार की पहचान रहा है। उच्च पूंजीगत व्यय बुनियादी ढांचे और पूंजी निवेश पर हमारे ध्यान को दर्शाता है, जो दीर्घकालिक वृद्धि के मजबूत इंजन हैं।''
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जो 2013 की तुलना में पांच गुना है। इसके जरिये सरकार ने दीर्घकालिक वृद्धि को गति देने के लिए बुनियादी ढांचा निर्माण, लॉजिस्टिक विस्तार और उभरते क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देने की अपनी रणनीति को मजबूत किया है। बजट में रेल, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना पर खर्च के साथ-साथ अनुपालन को आसान बनाने और ऋण प्रवाह में सुधार पर जोर दिया गया है, ताकि रोजगार सृजन और आर्थिक गति को बढ़ाया जा सके।
मोदी ने कहा, ''यह अल्पकालिक लोकलुभावन उपायों के बजाय उत्पादकता, रोजगार और भविष्य की आर्थिक क्षमता पैदा करने वाली परिसंपत्तियों में निवेश करने का एक सचेत रणनीतिक विकल्प है। इससे स्पष्ट होता है कि हमारा ध्यान लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने, युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने और देश को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाने पर है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे की उपेक्षा की गई, जिससे आम लोगों और भारतीय कारोबार के सामने चुनौतियां खड़ी हुईं। उन्होंने कहा, ''टूटा-फूटा और पुराना बुनियादी ढांचा उस देश के लिए उपयुक्त नहीं है, जो विकसित भारत बनने की आकांक्षा रखता है।''
उन्होंने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गति, पैमाने और अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान देने और इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव करने के साथ मौजूदा ढांचे को भी उन्नत किया है। पिछले एक दशक में भारत ने अपने इतिहास का सबसे व्यापक बुनियादी ढांचा निर्माण अभियान देखा है, जिसमें गुणवत्ता पर अभूतपूर्व जोर रहा है।
उन्होंने विस्तार के पैमाने को रेखांकित करते हुए कहा कि हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है, हजारों विमानों के ऑर्डर दिए जा रहे हैं, मेट्रो सेवाओं वाले शहरों की संख्या चार गुना से अधिक हो गई है, ग्रामीण सड़कों और इंटरनेट कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है तथा माल ढुलाई गलियारों, बंदरगाहों और तटीय संपर्क के परिवर्तनकारी विस्तार में निवेश किया गया है।
क्षेत्रवार आवंटन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय रेल के लिए लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है, जिसमें हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, माल ढुलाई क्षमता और यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने बताया कि दक्षिण हाई-स्पीड डायमंड कॉरिडोर सहित सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को लाभ होगा।
इसके साथ ही, यात्री मार्गों पर दबाव कम करने और उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत घटाने के उद्देश्य से समर्पित माल ढुलाई गलियारों का विस्तार किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए आवंटन एक दशक पहले की तुलना में लगभग 500 प्रतिशत बढ़ गया है। उभरते क्षेत्रों में निवेश पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण विनिर्माण, दुर्लभ खनिज कॉरिडोर और रसायन पार्क जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''ये रोजगार और निवेश को नई गति देंगे और भारत के भविष्य को मजबूत करेंगे।''
प्रधानमंत्री ने शासन सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि बजट की एक महत्वपूर्ण विशेषता भरोसा-आधारित शासन पर निरंतर बल है। उन्होंने कहा, ''विभिन्न क्षेत्रों, मंत्रालयों और प्रक्रियाओं में कागजी कार्रवाई कम की जा रही है, अपराधों का अपराधीकरण समाप्त किया जा रहा है और अनुपालन आवश्यकताओं को घटाया जा रहा है, क्योंकि सरकार राज्य को एक सक्षमकर्ता के रूप में देखती है और नागरिकों पर भरोसा करती है।''
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने 'समावेशी, प्रौद्योगिकी-संचालित लेकिन मानव-केंद्रित' कल्याण का एक ढांचा तैयार किया है, जो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है और किसी को पीछे नहीं छोड़ता। उन्होंने लाल किले से दिए गए अपने आह्वान 'यही समय है, सही समय है' को याद करते हुए कहा कि तात्कालिकता की यह भावना अब एक 'राष्ट्रीय विश्वास' बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है और महामारी के बाद की दुनिया भारत के लिए नए अवसर खोल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बजट को दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि इसे केवल 2026 का बजट नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह 2047 तक विकसित भारत की नींव रखने वाला दस्तावेज है। उन्होंने कहा, ''यह 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है। यह बजट 2014 से हासिल उपलब्धियों को एकीकृत करता है और उन पर आगे निर्माण करते हुए अगले 25 वर्षों के लिए नई रफ्तार देता है।''
