दिन का पारा चढ़ा: अगेती गेहूं की वालियों में दाने सिकुड़ने का अंदेशा, ज्यादा गर्मी से पैदावार पर पड़ेगा असर
बरेली, अमृत विचार। फरवरी के महीने में दोपहर के समय तेज धूप और बढ़ते तापमान से गेहूं की अगेती फसल के लिए चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय तापमान का अधिक बढ़ना गेहूं की अगैती फसल के लिए अच्छा नहीं है। फसल में वालियां आ चुकी हैं। अधिक गर्मी होने पर वालियों में दाने सिकुड़ने की संभावना रहती है।
आईवाआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रंजीत सिंह ने बताया कि नवंबर के शुरुआत में बोई गई गेहूं की फसल के लिए यह स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान बनने वाला शुष्क पदार्थ तने के जायलम और फ्लोएम के माध्यम से बालियों तक पहुंचता है। यदि अधिक गर्मी हो, तो शुष्क पदार्थ का निर्माण और बालियों तक पहुंचने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे दाने सिकुड़ सकते हैं और पैदावार में कमी आ सकती है।
उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि गेहूं की अगेती फसल में उचित नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए बौछारी सिंचाई के माध्यम से हल्की सिंचाई करना लाभकारी रहेगा। कहा कि खेत में जलभराव की स्थिति न बनने पाए, क्योंकि इससे हवा चलने पर फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
अन्य विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि किसानों को इस समय फसल की देखभाल में सतर्क रहना होगा और तापमान में अचानक वृद्धि के कारण पैदावार पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए नियमित सिंचाई और खेत की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी डा. ऋतुषा तिवारी का कहना है कि इस वक्त गेहूं की अगेती फसल में किसानों को सावधानियां रखने की आवश्यकता है। बढ़े हुए तापमान से फसल अवधि में करीब दस दिन और उत्पादन में करीब 5 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। किसान खेत में नमी बनाए रखें।
