Bareilly: भारतीय वस्तुओं का अमेरिका बड़ा बाजार, निर्यात में होगी वृद्धि

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता लागू होने से व्यापारी और उद्यमियों में उत्साह और खुशी देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि भारतीय उत्पादों पर ट्रंप टैरिफ घटाने से व्यापार में काफी रफ्तार आएगी। भारतीय वस्तुओं का अमेरिका में बड़ा बाजार है, जिससे निर्यात में तेजी से वृद्धि होगी। 

इतना ही नहीं लघु एवं मध्यम उद्यमियों को भी नए अवसर मिलेंगे। अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ ही विकास में भी रफ्तार आएगी। हालांकि अभी भी 18 प्रतिशत टैरिफ लगा रहेगा। पचास प्रतिशत को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा से बेहतरी की उम्मीद जगी है। बरेली के जरी-जरदोजी कारोबार को मजबूती मिलेगा और कारीगरों के कमाई अवसर बढ़ेंगे।

दरअसल, ट्रंप टैरिफ की मार से बेजान हो रहे निर्यात में एक बार अब टैरिफ कम होने से फिर से जान आ गई है। नए आर्डर मिलने के लिए निर्यातक आशान्वित हैं। उन्हें टैरिफ घटने से कारोबार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में कई आशंकाओं के चलते पिछले कई महीने से उद्यमियों के चेहरे पर मायूसी थी। 

वह सरकार की ओर नजर जमाए हुए थे। वहीं वैश्विक बाजार में नई संभावनाएं तलाश कर पर्यटन वाले देशों की ओर रुख किया जा रहा था। अब ट्रंप टैरिफ में 50 की जगह 18 प्रतिशत करने की घोषणा से नई उम्मीद जगी है। इसका सभी उद्यमियों ने स्वागत किया है। राहत भरे आदेश के बाद अब बाजार एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगी।

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल बरेली महानगर महामंत्री राजेश जसोरिया ने बताया कि भारतीय वस्तुओं का अमेरिका बड़ा बाजार है। ट्रंप टैरिफ कम होने से हमारे निर्यात में वृद्धि होगी और लघु एवं मध्यम उद्यमियों को नए अवसर प्राप्त होंगे। अर्थव्यवस्था में जहां तेजी आएगी वहीं, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कुल मिलाकर यूरोपीय यूनियन व अमेरिका से होने वाले व्यापारिक समझौते भारत के विकास की गति में एक बार फिर से मील का पत्थर साबित होंगे।

लघु उद्योग भारती अध्यक्ष आशुतोष शर्मा के मुताबिक भारत और अमेरिका निर्यात संघ एक बहुत ही अच्छा कूटनीतिक कदम है। 50 फीसदी से 18 फीसदी टैरिफ से निर्यात उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। साथ में उद्योग जगत में संदेश जाएगा कि भारत और अमेरिका के संबंध अच्छे हैं। निर्यात व्यापार केवल दोस्त देशों में ही अच्छी तरह से संभव है। अगर किसी देश के साथ संबंध खराब हो जाते हैं तो निर्यात व्यापार अच्छे से नहीं हो पाता और रिस्क लेवल बहुत बढ़ जाता है।

आईआईए सीईसी मेंबर बिमल रेवाड़ी ने बताया कि अमेरिका से व्यापार समझौता होने से विशेषकर गारमेंट एवं फार्मा सेक्टर को दोबारा से अमेरिका में व्यापार करने का द्वार खुल गया है। यह सरकार की बहुत ही बारीकी जीत है। व्यापार समझौते की लंबे समय से इंतजार थी। यह समझौता श्रम-प्रधान उद्योगों को वास्तविक लाभ देगा। इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करता हूं।

उद्यमी अभिनव अग्रवाल के मुताबिक भारत ने यूरोपीय संघ के साथ जिस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दिया उसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। उसके साथ ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौता निश्चित ही हमारे श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे फुटवियर एवं लेदर गुड्स, वस्त्र एवं परिधान, हस्तशिल्प, खिलौने, टेक्सटाइल उद्योगों को बल मिलेगा। एमएसएमई उद्योग के हित में है। इस बढ़े हुए टैरिफ को वापस लेना स्वागत योग्य है।

 

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