सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी और शाह पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले वकील को फटकार लगाई

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाले एक वकील की फटकार लगायी है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान चेतावनी दी कि किसी कानून या विचारधारा से असहमति को आपराधिक अपराध में नहीं बदला जा सकता। 

न्यायालय ने पूछा, "अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करती है, तो क्या यह अपराध है?" अदालत ने स्पष्ट किया कि इसका समाधान संवैधानिक चुनौती में है, न कि कानून निर्माताओं पर मुकदमा चलाने में। जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को पता चला कि उक्त वकील 1995 से प्रैक्टिस कर रहे हैं, तो उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। 

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लोग कानूनी पेशे के सदस्यों पर भरोसा करते हैं, इसलिए ऐसे तुच्छ आवेदन नहीं दाखिल करने चाहिए। न्यायालय की टिप्पणियों के बाद वकील ने अपनी गलती स्वीकार की और कहा कि वह मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने वचन दिया कि वह अलवर में पुलिस को दी गई अपनी पिछली शिकायत के संबंध में कोई समान शिकायत या याचिका दायर नहीं करेंगे। 

वकील के खेद व्यक्त करने और भविष्य में ऐसी कार्यवाही न करने का वचन देने के बाद, न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उन पर लगाए गए 50,000 रुपये के जुर्माने को स्थगित कर दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वकील ने अपने वचन का उल्लंघन किया, तो यह जुर्माना आदेश प्रभावी हो जाएगा।  

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