Uttrakhand: आज शाम आसान होगा सूर्य के नजदीकी बुध ग्रह का दीदार 

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Published By Monis Khan
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अमृत विचार, नैनीताल। गुरुवार की शाम बुध ग्रह को देख पाने का सुनहरा मौका होगा। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार बुध ग्रह सूर्य से अधिकतम दूरी पर होने के कारण यह संयोग बन रहा है। इस खगोलीय घटना में बुध और सूर्य के बीच दूरी 18 डिग्री की होगी। सूर्यास्त के समय बुध ग्रह को देखा जा सकता है।

बुध एक ऐसा ग्रह है, जो सूर्य के नजदीक बना रहता है। इसकी ऑर्बिट ही कुछ ऐसी है कि सूर्य के नजदीक होने के कारण प्रकाश की चकाचौंध में नहाया रहता है। जिस कारण इसे देख पाना आसान नहीं हो पाता है। वर्ष में कुछ ही ऐसे दिन होते हैं, जब यह सूर्य से दूर पहुंच जाता है तो इसे देखा जा सकता है। क्योंकि इस दौरान सूर्य का प्रकाश बुध पर कम पड़ता है। अब 19 फरवरी को यह सूर्य से 18 डिग्री की दूरी पर पहुंच रहा है। 

ज्ञातव्य हो एक डिग्री का मान यानी स्केल दो पूर्ण चंद्रमा के बराबर होता है। भारतीय समयानुसार लगभग पूर्वान्ह 11.30 यह दोनों एक दूसरे की सर्वाधिक दूरी पर होंगे, लेकिन उस समय दिन होने के कारण बुध को नहीं देखा जा सकता है, लेकिन सूर्यास्त के समय आसानी से देखा जा सकता है। सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज पर बुध असमान में थोड़ा ऊपर होगा, जो

तारे के समान चमकीला नजर आएगा। इसकी चमक -3. 9 मैग्नीट्यूड होगी। इसके पास में ही शनि ग्रह भी मौजूद होगा। जिसे आसानी से देखा जा सकेगा। बुध को देख पाने के लिए अधिकतम समय घंटेभर का ही मिल पाएगा। इसके बाद अस्त हो जाएगा। इसके बाद सूर्य और बुध के बीच की दूरी कम होती चली जाएगी और बुध को देख पाना भी कठिन होता चला जाएगा। 

बुध और सूर्य के बीच दूरी कम ज्यादा होते रहती है 
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डा शशिभूषण पांडे के अनुसार बुध की कक्षा अंडाकार है, इसलिए दूरी लगातार बदलती रहती है। बुध के नजदीक आने पर  न्यूनतम दूरी  लगभग 46 मिलियन किमी की होती है और दूर होने पर लगभग 69.8 मिलियन किमी हो जाती है। इनके बीच औसत दूरी लगभग 57.91 मिलियन किमी मानी जाती है। आकार में बुध बहुत छोटा ग्रह है, जिसका व्यास लगभग 4,879 किमी है, जो पृथ्वी का लगभग 38 प्रतिशत है। इसका कोर अधिकांश लोहे का है। यह 88 पृथ्वी दिन में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है। इसका अधिकतम तापमान  427 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसका वातावरण बहुत पतला है। इसके वातावरण में  ऑक्सीजन, सोडियम और हाइड्रोजन गैस मौजूद हैं। बुध हमेशा सूर्य के बहुत पास रहता है। अब यह सूर्य से दूर होगा तो वैज्ञानिक अध्ययन भी आसान होगा। यह दोनों वर्ष में कई बार एक दूसरे से दूर जाते हैं।

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