कच्चाथीवू द्वीप पर फिर विवादः तमिलनाडु के 22 मछुआरों को श्रीलंका नौसेना ने किया गिरफ्तार, सीएम स्टालिन ने केंद्र से मांगी मदद

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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चेन्नईः श्रीलंका नौसेना ने एक ताजा घटनाक्रम में पाक जलडमरूमध्य के निकट गहरे समुद्र में मछली पकड़ रहे तमिलनाडु के 22 मछुआरों को गुरुवार तड़के गिरफ्तार किया। रामनाथपुरम जिले के रामेश्वरम के रहने वाले ये मछुआरे बुधवार रात समुद्र में गये थे। उन पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार कर श्रीलंका के प्रादेशिक जल में मछली पकड़ने का आरोप है। गिरफ्तारी कच्चाथीवू द्वीप के समीप की गयी और उनकी चार मशीनीकृत नौकाएं भी जब्त कर ली गयीं।

गिरफ्तारी के बाद मछुआरों और नौकाओं को श्रीलंका के कंकेसनतुरै ले जाया गया, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है। तमिलनाडु के मछुआरों की लगातार हो रही गिरफ्तारियों से उनके परिवारों और मछुआरा समुदाय में गहरा आक्रोश है। मछुआरा संगठनों ने इस दीर्घकालिक समस्या के स्थायी समाधान और कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग दोहरायी है। यह घटना दो दिन पहले नागपट्टिनम, मयिलादुथुरै और पुडुचेरी के कराईकल क्षेत्र के 25 मछुआरों की गिरफ्तारी के बाद सामने आई है। उन्हें भी आईएमबीएल पार करने के आरोप में पकड़ा गया था और कंकेसनतुरै नौसैनिक शिविर ले जाकर मत्स्य विभाग को सौंपा गया था। गिरफ्तार मछुआरों में 12 नागपट्टिनम, तीन मयिलादुथुरै और 10 कराईकल के थे। पिछले कुछ महीनों में भी इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी के आरंभ और मध्य में भी कई मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था।

इस बीच, मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने केन्द्र सरकार से बार-बार अपील की है कि गिरफ्तार मछुआरों की रिहाई कूटनीतिक माध्यमों से सुनिश्चित की जाए और दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्यदल की बैठक बुलाकर इस जटिल मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाए। राज्यपाल के अभिभाषण में भी इस विषय का उल्लेख किया गया था। मुख्यमंत्री ने केंद्र से 1974 के समझौते के तहत श्रीलंका को सौंपे गए कच्चाथीवू द्वीप को वापस लेने की मांग दोहराते हुए कहा है कि इससे मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की बहाली का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किये गये हैं। मछुआरा संगठनों ने बार-बार हो रही गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से आजीविका की रक्षा और पाक जलडमरूमध्य क्षेत्र में पारंपरिक अधिकारों की बहाली के लिए स्थायी समाधान खोजने की मांग की है। 

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