कानपुर : एक और बच्ची की मौत के बाद सील किया गया निजी अस्पताल
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर जिले में अवैध व बिना मानक के संचालित निजी अस्पतालों पर एक तरफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोटिस-नोटिस का खेल खेला जा रहा था, उधर चौबेपुर में प्रकाश नर्सिंग होम में तीन बेड डालकर संचालित किए जा रहे अस्पताल में एक और बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत होने पर परिजनों ने कार्रवाई की मांग के लिए हंगामा किया, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम गुरुवार को मौके पर पहुंची और प्रकाश नर्सिंग होम पर सील की कार्रवाई की।
बिठूर के राजा हॉस्पिटल के एनआईसीयू में वार्मर मशीन में जलकर नवजात बच्ची की मौत होने की बात अभी तक लोग भुला भी नहीं सके थे, कि चौबेपुर के प्रकाश हास्पिटल में एक और बच्ची की मौत हो गई। बच्ची के पिता का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से बच्ची की मौत हुई है। नर्सिंग होम पर कार्रवाई हो, इसलिए उन्होंने नर्सिंग होम के बाहर शव रखकर हंगामा किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएचसी प्रभारी यशवर्धन सिंह मौके पर पहुंचे और कई बिंदुओं की जांच की। पीड़ित परिवार को हर संभव कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने मौके पर नेहा मेडिकल स्टोर को सील करने का आदेश दिया। गुरुवार को सीएमओ डॉ.हरिदत्त नेमी के निर्देश पर नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्हें प्रकाश नर्सिंग होम बिना मानक के संचालित मिला।
यहां तीन बेड डालकर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। जबकि यह क्लीनिक था, जिसका संचालन चोरी-चुपके नर्सिंग होम की तरह किया जा रहा था। पूर्व में इसका पंजीकरण भी रिजेक्ट जा चुका था। एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि प्रकाश नर्सिंग होम पर सील की कार्रवाई की गई है। साथ ही संबंधित डॉक्टर से जवाब तलब भी किया गया है। मामले में अगर कोई उत्तर नहीं आता है तो संबंधित पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विभाग का अभियान पूरी तरह नहीं आया काम
स्वास्थ्य विभाग ने अवैध व बिना मानक संचालित किए जा रहे निजी अस्पतालों के संचालन की रोकथाम और उनपर कार्यवाही के लिए अभियान संचालित किया गया। यह अभियान मुख्य रूप से कल्यानपुर क्षेत्र में चलाया गया और इसके बाद चकेरी क्षेत्र में अभियान का संचालन किया गया था। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम को 50 से अधिक निजी हॉस्पिटलों में कमियां मिली, जिस आधार पर उनको नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, लेकिन कुछ अस्पतालों पर विभाग के इस अभियान का खौफ नजर नहीं आ रहा है। अभी बिना मानक संचालित हो रहे हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
