समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार विसेन निलंबित, बोले मंत्री असीम अरुण- किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत 'कोर्स कोऑर्डिनेटर' पद के लिए चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने को लेकर समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक को निलंबित कर दिया गया है। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान में कहा गया है कि जांच के दौरान प्रथम दृष्टया लापरवाही पाये जाने के बाद समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार बिसेन को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ एक विभागीय जांच का आदेश दिया गया है। बयान के अनुसार, ''निलंबन अवधि के दौरान, बिसेन निदेशालय से संबद्ध रहेंगे और उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा।''

 बयान में कहा गया है कि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की एक गोपनीय शिकायत समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण को मिली थी, जिसके आधार पर जांच हुई और संयुक्त निदेशक बिसेन दोषी पाए गए। विभागीय मंत्री ने कहा, ''किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में भी इसी तरह आगे बढ़ कर कार्रवाई की जाएगी।'' गड़बड़ियों के बारे में बयान में कहा गया कि अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का मूल अभिलेखों से उपयुक्त सत्यापन नहीं हुआ। 

साक्षात्कार और चयन से जुड़े जरूरी दस्तावेज विभागीय पत्रावली में उपलब्ध नहीं थे तथा चयन प्रक्रिया की निगरानी के लिए गठित समितियों द्वारा साक्षात्कार लिये जाने और सत्यापन कराए जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।बयान के अनुसार, इसके अलावा संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर चयन की संस्तुति की गई, जिससे योजना की पारदर्शिता प्रभावित हुई। 

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत राज्य भर में संचालित केंद्रों के लिए कोचिंग कोर्स कोऑर्डिनेटर की आउटसोर्सिंग-आधारित भर्ती में कथित अनियमितताओं के संबंध में गत वर्ष 29 अक्टूबर को शिकायत मिली थी। जांच में यह सामने आया कि नियमानुसार कोर्स कोऑर्डिनेटर पद के लिए उप्र पीसीएस (लोक सेवा आयोग) मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था। इसके बावजूद कई ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया, जिन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। कुल 69 अभ्यर्थियों की जांच की गई, जिनमें केवल 21 अभ्यर्थी ही पात्र पाए गए। 

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