यूपी बजट सत्र : भ्रष्टाचार, डीजीपी नियुक्ति, एनकाउंटर और रोजगार पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने राज्य सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरते हुए भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, एनकाउंटर नीति और रोजगार जैसे विषयों पर गंभीर सवाल उठाए। माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सदन में भ्रष्टाचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई, जबकि आम जनता सबसे अधिक भ्रष्टाचार से ही परेशान है।
उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के मामले लोकायुक्त के पास लंबित हैं और कई अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज हैं, लेकिन उनकी स्थिति की कोई स्पष्ट जानकारी सदन को नहीं दी गई। उनका कहना था कि यदि लोकायुक्त की सिफारिशें सदन के पटल पर लाई जातीं, तो सदस्य भी उनकी समीक्षा कर सकते थे।
उन्होंने लोकायुक्त के कार्यकाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उनका कार्यकाल कब तक है। लोकायुक्त आठ वर्षों से पद पर हैं, इस विषय पर सरकार को स्पष्टता लानी चाहिए। कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाल के मामलों में पुलिसकर्मियों का नाम आपराधिक घटनाओं में सामने आना चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि डीजीपी कार्यालय प्रभावी ढंग से काम करता नहीं दिख रहा है और राज्य में कार्यवाहक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि उच्चतम न्यायालय की मंशा के अनुरूप स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की जाए, ताकि अधिकारी बिना किसी दबाव के काम कर सकें। एनकाउंटर की घटनाओं पर भी माता प्रसाद पांडेय ने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि किसी का भविष्य बर्बाद करने वाली गलत परंपरा शुरू नहीं होनी चाहिए। यदि आज गलत मिसाल कायम की जाएगी तो आने वाली सरकारें उससे भी आगे बढ़ सकती हैं। गैंगस्टर कानून में संशोधन की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के कार्यकाल में यह अधिनियम लाया गया था और तब भी उन्होंने इसका विरोध किया था।
उनका कहना था कि केवल गोली से अपराध खत्म नहीं होगा, बल्कि व्यवस्था में भरोसा पैदा करना जरूरी है। साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संगठित साइबर गिरोह आम लोगों को घर बैठे निशाना बना रहे हैं, सरकार को इनके खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। रोजगार के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छोटे और कुटीर उद्योगों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल रहा।
उन्होंने मांग की कि बंद पड़े उद्योगों को फिर से शुरू किया जाए और प्रदेश से बाहर पलायन कर चुके युवाओं को वापस लाने की ठोस नीति बनाई जाए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी वर्ग को अपनी मांग रखनी है तो वह सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करे, लेकिन पहले के बयानों और वर्तमान रुख में स्पष्टता होनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष के इन तीखे सवालों के बीच सदन में कई बार हलचल भी देखी गई। सरकार की ओर से इन मुद्दों पर जवाब की प्रतीक्षा बनी हुई है।
कांग्रेस ने सदन में उठाया सड़क सुरक्षा का मुद्दा, सरकार ने दिया जवाब
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को गंगा एक्सप्रेसवे पर पिछले दिनों हुए दर्दनाक हादसे का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस की नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा और ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय ने कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
आराधना मिश्रा ने कहा कि जिस गंगा एक्सप्रेसवे पर अभी तक आधिकारिक रूप से यातायात शुरू नहीं हुआ, उसी पर रायबरेली में एक तेज रफ्तार वाहन ने 9 महिलाओं को रौंद दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस वाहन का पांच बार पहले चालान हो चुका था, वह आखिर सड़क पर कैसे दौड़ रहा था? क्या निगरानी और प्रवर्तन तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक हैं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। एक सड़क दुर्घटना सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेती, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल देती है ।
वहीं, मनोज पांडेय ने बताया कि हादसे की शिकार महिलाएं और युवतियां एक भंडारे से लौट रही थीं। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे और घायलों के उपचार की व्यवस्था कराई। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने सदन में यह भी बताया कि दो घायल मीना और रिया की हालत बेहद गंभीर है और उनके इलाज पर लगभग ढाई-ढाई लाख रुपये का खर्च आ रहा है।
उन्होंने मांग की कि इनके उपचार की व्यवस्था विधायक के विवेकाधीन कोटे से कराई जाए। मनोज पांडेय ने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित सड़क अभी निर्माणाधीन थी और औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं हुई थी। ऐसे में ठेकेदार ने उस पर निजी वाहनों की आवाजाही कैसे होने दी? उन्होंने इस मामले में ठेकेदार की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग की।
जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसमें पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य और संबंधित विभागों को शामिल किया गया है। समिति प्रत्येक माह बैठक कर सड़क सुरक्षा की समीक्षा कर रही है और दुर्घटनाएं कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
