22 फरवरी से जापान के दौरे पर मुख्यमंत्री योगी, भविष्य की रेल तकनीक से होंगे रूबरू
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावना को तलाशने की कवायद के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 22 फरवरी से प्रस्तावित जापान यात्रा के दौरान अत्याधुनिक मैग्लेव (मैग्नेटिक लेविटेशन) ट्रेन आकर्षण का केंद्र रहेगी। यह ट्रेन चुंबकीय शक्ति के सहारे पटरी से ऊपर हवा में तैरते हुए चलती है।
मुख्यमंत्री अपने जापान प्रवास के दौरान इस हाईस्पीड ट्रेन में 100 किलोमीटर की परीक्षण यात्रा करेंगे जिसमें 50 किलोमीटर जाना और 50 किलोमीटर की वापसी होगी। मैग्लेव ट्रेन को आधुनिक परिवहन का भविष्य माना जा रहा है।
चुंबकीय तकनीक के कारण ट्रेन और ट्रैक के बीच प्रत्यक्ष संपर्क समाप्त हो जाता है, जिससे घर्षण लगभग शून्य हो जाता है। यही कारण है कि यह ट्रेन 600 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति हासिल करने में सक्षम है। जापान टोक्यो से नागोया के बीच मैग्लेव कॉरिडोर को वर्ष 2027 तक शुरू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है, जिसके बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा समय आधे से भी कम रह जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह यात्रा केवल तकनीकी जिज्ञासा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश में आधुनिक परिवहन ढांचे के विस्तार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में पहले ही एक्सप्रेसवे, मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम जैसे परियोजनाओं के जरिए गतिशील इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। ऐसे में मैग्लेव जैसी भविष्य की तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव नीति निर्माण और दीर्घकालिक योजना के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
जापानी विशेषज्ञों के अनुसार इस ट्रेन में सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट और अत्याधुनिक गाइडवे सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो इसे उच्च गति के साथ स्थिरता और सुरक्षा भी प्रदान करता है। फिलहाल ट्रायल चरण में संचालित यह ट्रेन जापान की तकनीकी क्षमता और नवाचार की मिसाल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री की प्रस्तावित यात्रा को भारत-जापान सहयोग के व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है।
हाईस्पीड रेल, स्मार्ट मोबिलिटी और सतत परिवहन के क्षेत्र में सहयोग से उत्तर प्रदेश समेत देश के परिवहन नेटवर्क को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। जापान की मैग्लेव ट्रेन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह सफर न केवल तकनीकी प्रगति का अनुभव होगा बल्कि तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की भावी तस्वीर को भी करीब से देखने का अवसर प्रदान करेगा।
