हाईकोर्ट : प्रतिबंधित स्थल पर नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द
प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संत कबीर नगर के दो छात्रों के खिलाफ दर्ज सम्पूर्ण आपराधिक मुकदमे को रद्द करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने का अधिकार है।
हालांकि, समाज की मिश्रित संस्कृति और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नागरिकों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और मापदंडों का पालन करना आवश्यक है। कोर्ट ने माना कि केवल प्रतिबंधित स्थल पर नमाज अदा करने के इरादे के आधार पर दर्ज आरोप आवेदक के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं और परिस्थितियों में यह अभियोजन उचित नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आरोपपत्र और समन आदेश सहित पूरी कार्यवाही निरस्त करते हुए दोनों याचियों को भविष्य में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों और प्रतिबंधों का पालन करने की चेतावनी भी दी। दोनों छात्रों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143 (अनधिकृत जमाव) और 188 (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना) के तहत पुलिस स्टेशन खलिलाबाद, संत कबीर नगर में एफआईआर दर्ज की गई थी। निचली अदालत ने मई 2019 में संज्ञान लेकर उनके विरुद्ध समन जारी किया था। याची अजीम उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दोनों छात्र हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। मुकदमा केवल नमाज अदा करने के आधार पर दर्ज किया गया, जो उनकी धार्मिक आस्था का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे “मामूली अपराध” में अभियोजन जारी रहने से याची के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता ने आपराधिक इतिहास न होने की बात स्वीकार की, लेकिन तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ स्थानों पर नमाज अदा करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। याचियों ने जानबूझकर इन निर्देशों की अवहेलना की, जिससे शांति और सद्भाव प्रभावित हो सकता था।
