Bareilly : डाॅक्टर न आक्सीजन, कैसे चले ट्रामा सेंटर
सबसे मुश्किल जिला अस्पताल से ट्रामा सेंटर तक आक्सीजन की सप्लाई पहुंचाना
बरेली, अमृत विचार। गंभीर मरीजों के लिए जिला अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर को बने दो साल हो चुके हैं, मगर अभी तक सेंटर शुरू नहीं हो सका है। यहां न तो डाक्टरों की तैनाती और न ही वेंटीलेटर तक ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था हो पाई है। स्टाफ की तैनाती के लिए जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से शासन को पत्र लिखा चुका है, मगर स्थिति जस की तस है।
जिले में होने वाले हादसों व गोली लगने से घायल मरीजों की जान बचाने के लिए ट्रामा सेंटर बनाया गया है। वर्ष 2023 में बिल्डिंग का निर्माण पूरा हो चुका है। ट्रामा सेंटर में सबसे जरूरी आक्सीजन है, मगर वहां आक्सीजन तक की सप्लाई नहीं है। जिस जगह आक्सीजन का प्लांट लगा है। वहां से सड़ृक के नीचे से खुदाई करके आक्सीजन के लिए पाइप लाइन को सड़क के दूसरी तरफ बने ट्रामा सेंटर तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। यह काम अभी तक नहीं हो सका है। अब तक यहां किसी सर्जन की तैनाती नहीं की गई है। गंभीर रोगियों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। ऐसी में गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। अगर ट्रामा सेंटर शुरू हो जाए तो गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। यहां प्रशिक्षित स्टाफ के साथ साथ न्यूरोसर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, एनेस्थेटिक समेत प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए, मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दुकानों के नीचे से खुदाई के लिए लेनी होगी अनुमति
ऑक्सीजन प्लांट जिला अस्पताल की बिल्डिंग में लगाया गया है। उसके बाहर घंटाघर जाने वाली सड़क है। वहां पर व्यापारियों की निजी दुकानें हैं। दुकानों के नीचे से खुदाई करके ऑक्सीजन की पाइप लाइन को ट्रामा सेंटर तक पहुंचना होगा। इसके लिए व्यापारियों की हामी जरूरी है। इसके बाद ही वहां पर खुदाई की की जा सकती।
ट्रामा सेंटर की बिल्डिंग तैयार हो चुकी है। जिला अस्पताल प्रशासन को बिल्डिंग हैंडओवर की जा चुकी है। -डाॅ. विश्राम सिंह, सीएमओ।
