यूपी विधानसभा में विपक्ष का हंगामा: सपा विधायक के सवाल पर बढ़ा विवाद, कार्यवाही बाधित

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में भर्तियों में आरक्षण के मुद्दे पर शुक्रवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक रागिनी सोनकर ने राज्य स्तरीय भर्तियों में अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी को दिए जा रहे आरक्षण को लेकर सरकार से सवाल पूछा। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए बताया कि अप्रैल 2017 से अब तक कुल 47 हजार पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इनमें 18 हजार सामान्य वर्ग, 2081 (ईडब्ल्यूएस), 9580 अनुसूचित जाति, 447 अनुसूचित जनजाति और 17,295 ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी दी गई है।

सपा सदस्य रागिनी सोनकर के सवाल को लेकर हंगामा 

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट रागिनी सोनकर ने पूरक प्रश्न पूछते हुए आरक्षण के अनुपालन को लेकर दोबारा स्पष्टीकरण मांगा। इसी दौरान सत्ता पक्ष के सदस्य भी खड़े होकर हंगामा करने लगे, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। स्थिति को संभालते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सत्तापक्ष के सदस्यों पर नाराजगी जताई। 

उन्होंने कहा, "जब हम विपक्ष से बात कर रहे हैं तो आप लोग हंगामा क्यों कर रहे हैं। सदन हमें चलाना है या आपको। " इसके बाद अध्यक्ष ने नाराजगी में अपना हेडफोन टेबल पर रख दिया और सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। हालाकि 10 मिनट बाद सदन की कार्यवाही दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो गई।

सदन में उठा आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस का मुद्दा 

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण और किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस दिए जाने का मामला सदन में उठाया गया। सरकार ने दोनों ही मामले में सदन में जवाब दिया। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक संग्राम यादव ने आजमगढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े 100 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने कहा कि वर्षों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है और उन्हें सेवा सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही। जवाब में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की वर्तमान नीति के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक पृथक निगम का गठन किया गया है, जिससे वेतन भुगतान और सेवा शर्तों में मनमानी की शिकायतों को रोका जा सके। 

इस पर विपक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कंपनियों के माध्यम से वेतन वितरण में पारदर्शिता की कमी है तथा ईपीएफ की कटौती के बावजूद कई मामलों में राशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

इस दौरान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह वर्ष के किशोरों को 50 सीसी तक के वाहन चलाने हेतु लाइसेंस देने के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि इस विषय में केंद्र सरकार से अनुमति का अनुरोध किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुछ इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उपलब्ध हैं और केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। 

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