Holika Dahan 2026: इस बार होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया, आखिर कब जलेगी होलिका, जानें सही समय  

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचारः इस बार होली पर भद्रा रहेगी और दोपहर बाद चंद्रग्रहण भी है, इससे होलिका दहन को लेकर असमंजस की स्थिति बनती दिख रही है। हालांकि ज्याेतिषाचार्य के अनुसार 3 मार्च को तड़के 4:56 बजे के बाद होलिका दहन उत्तम रहेगा, क्योंकि तब भद्रा काल समाप्त हो जाएगा। भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को होलिका दहन उत्तम माना गया है।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि काशी के ऋषिकेष पंचांग अनुसार 2 मार्च को शाम 5:18 बजे से 3 मार्च शाम 4:33 तक पूर्णिमा तिथि है। 2 मार्च को शाम 5:18 से सुबह 4:56 बजे तक भद्रा रहेगी। होलिका का दहन 2 मार्च को भद्रा पुच्छ में रात 12:50 से रात 2:02 बजे तक तक या फिर भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह 4:56 बजे के बाद 3 मार्च को होलिका दहन करना रंग 4 मार्च को खेले जाएगी। स्नान दान के लिए पूर्णिमा 3 मार्च है। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी है। यह ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण देश के कुछ हिस्सों में दिखेगा। 

चंद्रग्रहण दोपहर 3: 21 मिनट से शाम 6: 46 मिनट तक पड़ेगा। 3 मार्च को सुबह 9:20 बजे से शाम 6 :46 तक 9 घंटे तक सूतक रहेगा। ग्रहण के कारण होली से जुड़ा कार्य नहीं होगा। ज्योतिषाचार्य ने कहा कि यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो लेकिन भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिये। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। लेकिन भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये।

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