बजट पर चर्चा: विपक्ष के हर सवाल का जवाब ... आखिरी दिन विधानसभा में सीएम योगी का संबोधन
अमृत विचार। यूपी के बजट सत्र का आज आखिरी दिन है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की आर्थिक उपलब्धियों और विकास योजनाओं को विस्तार से रखा। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें शिवपाल सिंह यादव का "श्राप" न लगे। साथ ही उन्होंने लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए सदन के सभी सदस्यों का अभिनंदन किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को 10वां बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और अन्य सदस्यों की बजट संबंधी चर्चा के जवाब में बजट सत्र के अंतिम दिन कहा, "यह बजट हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि प्रदेश के इतिहास में किसी मुख्यमंत्री को 10वां बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है, यह पहली बार हुआ है।"
उन्होंने कहा कि यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार कोई मुख्यमंत्री दसवीं बार बजट पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार कर्ज के अनुपात को घटाकर 27 प्रतिशत से 23 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। राज्य की आय में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकारी आय लगभग 43 हजार करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि भारत तभी विकसित होगा, जब उसके राज्य विकसित होंगे और उत्तर प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पहले उत्तर प्रदेश को देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता था, लेकिन अब प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि वर्ष 2026-27 तक प्रदेश की जीडीपी 40 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचाई जाएगी।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश की छवि इतनी खराब हो गई थी कि बाहर से आने वाले लोगों को होटल में कमरे तक नहीं मिलते थे। लेकिन आज उत्तर प्रदेश के लोगों को देशभर में सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार बनी, तब किसानों की कर्ज माफी की घोषणा के बावजूद कहीं से आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा था, क्योंकि प्रदेश की छवि खराब थी।
उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश का खजाना खाली था, लेकिन सरकार ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाकर और सरकारी धन के लीकेज को रोककर वित्तीय स्थिति सुधारी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन किया है। वर्ष 2026 में प्रदेश का पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) बढ़कर 1 लाख 77 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की मजबूत आधारशिला हैं।
वर्ष 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ ने संभाला और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। योगी सरकार ने विधानसभा में 11 फरवरी को लगातार 10वां बजट पेश किया था। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 9.13 लाख करोड़ रुपये का बजट बुधवार को पेश किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 12.2 प्रतिशत अधिक है।
सीएम योगी की बड़ी बातें
सदन में आखिरी दिन सीएम योगी ने बजट सत्र पर बोलते हुए सत्ता और विपक्ष को लेकर सार्थक चर्चा के लिए धन्यवाद किया। इसके साथ ही सदन में अपने सम्बोधन की शुरुआत में चुटकी लेते हुए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को शिवपाल यादव का श्राप न लगे, और वे स्वस्थ रहने की कामना की।
योगी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा, "कई वर्षों बाद बजट सत्र दो सप्ताह की यात्रा पूरी कर समापन की ओर बढ़ रहा है और आपने (विधानसभा अध्यक्ष) जिस कुशलता के साथ इस सत्र को संचालित किया, या फिर बजट के मुद्दे पर जो चर्चाएं थी, उन सभी मुद्दों पर जो रुचि सदस्यों ने दिखाई वह अत्यंत ही सार्थक रही।"
उन्होंने कहा, "मैं सदस्यों को बधाई देता हूं कि जिस तरह लोकतंत्र की सशक्तिकरण का शंखनाद उप्र की विधानसभा के माध्यम से दिया है, इसके लिए सभी का हृदय से अभिनंदन है।" नेता सदन ने कहा, "मैं धन्यवाद दूंगा कि मेरे सहयोगी (वित्त व संसदीय कार्यमंत्री) सुरेश कुमार खन्ना ने जो बजट प्रस्तुत किया उसफ्र नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव का वक्तव्य सुना और वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "सदस्यों ने यह साबित किया कि वास्तव में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था के रूप में विधायिका अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और समस्याओं के समाधान का रास्ता संवाद हो सकता है।
यूपी विधानसभा के बजट सत्र में प्रदेश पर बढ़ते कर्ज, कंसोलिडेटेड फंड और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार को वित्तीय प्रबंधन और जनसेवाओं के मुद्दे पर घेरा, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब दिया। माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि प्रदेश पर नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार इस मुद्दे से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट बनाते समय वास्तविक स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे सरकार: माता प्रसाद
इस पर सुरेश खन्ना ने शुरुआत में आपत्ति जताई, हालांकि बाद में कर्ज के आंकड़े को स्वीकार किया। नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अस्पतालों से मरीजों को मेडिकल कॉलेजों और बड़े संस्थानों में रेफर करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जीवन-मरण से जुड़ा विषय है, इसलिए यहां संविदा और आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में एक हजार लोगों पर केवल 0.37 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक एक हजार पर एक डॉक्टर का है। जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में दवाओं की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता भी उन्होंने प्रमुख समस्या बताई। पांडेय ने कहा कि यदि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज ठीक से कार्य करें तो मरीजों को लखनऊ के बड़े संस्थानों, जैसे संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, में रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने आयुष्मान योजना की जांच कराने और स्वास्थ्य विभाग को "दलालों से बचाने" की भी मांग की। प्रतिव्यक्ति आय और विकास के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सरकार आंकड़ों से खेल रही है और वास्तविक स्थिति को छिपा रही है। उन्होंने समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए लखनऊ के इकाना स्टेडियम, लोक भवन, पुलिस मुख्यालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय परिसर के विकास कार्यों को गिनाया।
उन्होंने चुनौती दी कि वर्तमान सरकार एक्सप्रेसवे के अलावा कोई बड़ा विकास कार्य गिनाए। साथ ही कई विभागों में पूरा बजट खर्च न होने और केंद्र से मिलने वाले कर हिस्से में कमी आने का मुद्दा भी उठाया। नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आलोचना छोड़कर जनहित के मुद्दों पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
