UP में पहली बार शुरू हुआ Coroventis तकनीक से इलाज : KGMU में दिल के मरीजों को मिलेगी राहत

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Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के कार्डियोलॉजी विभाग में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, उत्तर प्रदेश में पहली बार केजीएमयू में कोरोवेंटिस सिस्टम का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। यह अत्याधुनिक तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी, जिन्हें सीने में दर्द (एंजाइना) की शिकायत होती है, यह जानकारी कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं हेड  डॉ. ऋषि सेठी ने सोमवार को दी है।

डॉ. ऋषि सेठी ने बताया यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी जहां धमनियों में गंभीर रुकावट नहीं होने के बावजूद लक्षण बने रहते हैं। इससे अनावश्यक स्टेंटिंग से बचाव संभव होगा और मरीजों को सटीक और लक्षित उपचार प्रदान किया जा सकेगा। उन्होंने यह प्रदेश में हृदय रोग उपचार की गुणवत्ता को एक नई दिशा देगा।

उन्होंने बताया कि (इटली) से आयीं विशेषज्ञ डॉ. लुडोविका माल्टीज़ के विशेष मार्गदर्शन और उपस्थिति में इस तकनीक से चार मरीजों का इलाज भी किया गया है, इस दौरान डॉ. मोनिका भंडारी,डॉ. आयुष शुक्ला और डॉ. अभिषेक सिंह द्वारा किया गया। जबकि डॉ. शरद चंद्रा, डॉ. अक्षय प्रधान, डॉ. गौरव चौधरी और डॉ. अखिल शर्मा द्वारा आवश्यक अकादमिक और तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया।

डॉ. अक्षय प्रधान ने कहा कि धमनियां रक्त वाहिकाएं हैं जो मुख्य रूप से हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को पूरे शरीर में पहुंचाती हैं, बड़ी धमनियों में रुकावट को देखना आसान होता है, जबकि कई पतली धमनियां होती है, जिनमें रुकावट को देख पाना संभव नहीं होता है, लेकिन कोरोवेंटिस तकनीक से पतली से पतली धमनियों को देखना भी आसान होता है।

डॉ. आयुष शुक्ला ने कहा, “अक्सर एंजाइना के मरीजों में एंजियोग्राफी में गंभीर रुकावट दिखाई नहीं देती, जिससे उपचार रणनीति तय करना कठिन हो जाता है। कोरोवेंटिस सिस्टम से हमें वास्तविक फंक्शनल आकलन करने में मदद मिलती है, जिससे उपचार अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनता है।”

डॉ. अभिषेक सिंह ने कहा,“यह प्रणाली इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इससे हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि केवल उन्हीं मरीजों में स्टेंटिंग की जाए जहां वास्तव में उसकी आवश्यकता हो, और बाकी मरीजों को उचित औषधीय उपचार दिया जाए।”

मिलान (इटली) से आयीं विशेषज्ञ डॉ. लुडोविका माल्टीज़ ने कहा, “फिजियोलॉजी-गाइडेड कोरोनरी इंटरवेंशन”आधुनिक कार्डियोलॉजी की दिशा है। मुझे प्रसन्नता है कि केजीएमयू जैसे संस्थान ने इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया है, जो मरीजों को बेहतर और प्रमाण-आधारित उपचार प्रदान करने में सहायक होगी।”
कार्डियोलॉजी विभाग आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए प्रदेश के मरीजों को विश्वस्तरीय एवं प्रमाण-आधारित हृदय उपचार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

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