जल निगम के रिटायर्ड कर्मी के बेटे विवेक जीना ने रोशन किया चोपड़ा गांव का नाम

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Published By Pawan Singh Kunwar
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पवन सिंह कुंवर

अमृत विचार: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य पर नजर हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। नैनीताल के चोपड़ा गांव के रहने वाले विवेक सिंह जीना ने इसे सच कर दिखाया है। हाल ही में घोषित हुए परिणामों में विवेक का चयन उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में स्केल-1 ऑफिसर के पद पर हुआ है। खास बात यह है कि विवेक ने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि वह टॉपर्स की सूची में भी शामिल रहे। विवेक ने 100 में से 58.45 अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, जबकि परीक्षा टॉपर के 60.78 अंक रहे। विवेक की शुरुआती शिक्षा चोपड़ा के सरकारी स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने विद्या मंदिर बाजपुर से इंटरमीडिएट और नैनीताल के प्रसिद्ध डीएसबी परिसर से एमएससी की डिग्री हासिल की। करियर की शुरुआत में उन्होंने तीन साल उत्तराखंड की सरकारी परीक्षाओं की तैयारी को दिए। लेकिन आयोग की अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रियाओं में बार-बार होने वाली देरी को देखते हुए उन्होंने एक साहसी निर्णय लिया और बैंकिंग क्षेत्र की ओर रुख किया। विवेक के करियर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब वह उपनल के माध्यम से जल निगम में करीब ढाई साल तक कार्यरत रहे। कई युवा जहां 'परमानेंट' होने के इंतजार में सालों एक ही जगह गुजार देते हैं, वहीं विवेक ने अपनी मंजिल पाने के लिए इस सुरक्षित नौकरी को छोड़ने का बड़ा जोखिम उठाया और दिल्ली-एनसीआर की ओर रुख किया।

300 किलोमीटर दूर नोएडा में नौकरी के साथ 'तपस्या'

अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए विवेक घर से 300 किलोमीटर दूर नोएडा आ गए। यहां उन्होंने एक ट्रेडिंग कंपनी में नौकरी जॉइन की ताकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र रह सकें। दिनभर ऑफिस की व्यस्तता और रात भर किताबों के साथ संघर्ष यही उनका रोज का नियम बन गया। विवेक बताते हैं कि नोएडा जैसे शहर की भागदौड़ और ऑफिस की थकान के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।

क्षेत्र और परिवार का बढ़ाया मान

विवेक की इस उपलब्धि से उनके पिता प्रताप सिंह जीना (जो स्वयं जल निगम में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं) और उनके माता-पिता व ग्रामीण बेहद गौरवान्वित हैं। विवेक की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो समय की कमी या सिस्टम की कमियों का बहाना बनाकर हार मान लेते हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि सफलता सही समय पर लिए गए साहसी फैसलों और निरंतर मेहनत का ही परिणाम है।

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