विश्वविद्यालय में नमाज और इफ्तारी करने पर भड़के छात्र... दूसरे गुट के छात्रों ने पढ़ी हनुमान चालीसा और लगाए हर-हर महादेव के नारे

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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दिनभर परिसर में भारी पुलिस बल की रही तैनाती

लखनऊ, अमृत विचार: लखनऊ विश्वविद्यालय की लाल बारादरी छात्र राजनीति का अखाड़ा बन गई है। रविवार को बारादरी जीर्णोद्धार के विरोध में जहां समाजवादी छात्र सभा, एनएसयूआई और आइसा के सदस्यों ने नमाज पढ़कर रोजा इफ्तार किया था, वहीं सोमवार को जीर्णोद्धार का समर्थन कर रहे छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। विवाद को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रवेश रोकने के लिए जर्जर भवन को चारों तरफ से ढक दिया गया है।

छात्र नेता आलोक मिश्रा ने कहा परिसर में पहले से अवैध मजारें भी मौजूद हैं, उनकी जांच कर प्रशासन कार्यवाही करे व ध्वस्त करें। अनुराग सिंह तोमर ने कहा विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर है, यहां ऐसी गतिविधियां माहौल खराब करेंगी। विवेक मिश्रा ने कहा परिसर में आने पर हम अपनी धार्मिक पगड़ियां घर उतार कर आते हैं। हम यहां कोई ऐसी गतिविधि नहीं करते तो नमाज और इफ्तारी भी नहीं होने देंगे। प्रदर्शन करने वालों में कनिष्क तिवारी, हरीश मिश्र, सौरभ गिरी, प्रांशु शुक्ला, युवराज सिंह, अविरल सिंह, उदयवीर राज, अर्पित शुक्ला, आदर्श दुबे, सूरज सिंह, शिवम सिंह, तुषार वर्मा, सहित अनेक छात्र शामिल रहे। उधर, छात्र नेता जतिन शुक्ला के नेतृत्व में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि ऐतिहासिक धरोहर को कुदाल फावड़ों से क्षतिग्रस्त करने वालों पर और सड़क पर नमाज और इफ्तारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो।

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विश्वविद्यालय के सर्वाधिक पुराने इस भवन में कभी टीचर्स क्लब, बैंक और कैंटीन हुआ करती थी। अत्यंत जर्जर होने के कारण करीब 10 वर्ष पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे बंद कर दिया था। भवन जर्जर होने के चेतावनी बोर्ड भी लगा दिए गए थे। इसके बावजूद कुछ छात्र-छात्राएं सीढ़ियों पर बैठ जाया करते थे, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। इसे देखते हुए प्रशासन ने भवन का सील कर दिया गया है।

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लाल बारादरी की जर्जर हालत

लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर के बीचो-बीच स्थित करीब 225 वर्षों पुराना यह भवन जर्जर हालत में हैं और इसमें बड़ी-बड़ी झाड़ियां और पेड़ उग आए हैं। यहां पर करीब दस वर्ष पूर्व कैंटीन हुआ करती थी, इसके अलावा बैंक भी था। लेकिन भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए कैंटीन और बैंक को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। चेतावनी बोर्ड भी अरसे से लगा है जिसमें बताया गया है कि यह भवन क्षतिग्रस्त और असुरक्षित है। भवन में प्रवेश एवं अन्य गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।

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लविवि के प्रवक्ता डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने कहा कि लाल बारादरी की इमारत जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थी। इस इमारत में मौजूद यूको बैंक व स्टाफ क्लब इसीलिए हटाए गए। इमारत में बोर्ड लगा दिए जाने के बावजूद बच्चे इसमें अनधिकृत रूप से प्रवेश कर रहे थे और रील बना रहे थे। इमारत किसी भी वक्त गिर सकती है। किसी के जानमाल का नुकसान न हो, इसलिए इमारत में सभी का प्रवेश वर्जित किया गया है। इसका किसी समुदाय विशेष से लेना-देना नहीं है। लाल बारादरी के जीर्णोद्धार के लिए पुरातत्व विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। यदि कहीं से कोई धन प्राप्त होगा तो इमारत का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

 

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