इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दिया 'सप्राइज', भारतीय कपड़े पहनकर किया डिनर...
नई दिल्लीः भारत-इजरायल संबंधों में एक नया गर्मजोशी भरा अध्याय जुड़ गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त डिनर से पहले पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर सबको चौंका दिया। उन्होंने एक्स पर हिंदी में पोस्ट किया कि "हमारे संयुक्त रात्रिभोज से पहले, मैंने अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी को पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर चौंका दिया।"
https://twitter.com/narendramodi/status/2026872047662674295?s=20
नेतन्याहू का लुक क्या था?
पीएम नेतन्याहू ने सफेद फुल स्लीव शर्ट के ऊपर लाइट ग्रे/स्टोन कलर का नेहरू जैकेट (जिसे मोदी जैकेट भी कहते हैं) बैंड कॉलर, स्लीवलेस, टेलर्ड फिट पहने हुए थे। इसके साथ ही नीचे डार्क फॉर्मल पैंट और काले फॉर्मल जूते। यह इंडियन-वेस्टर्न मिक्स स्टाइल था, जो दोस्ती और सांस्कृतिक सम्मान का शानदार प्रतीक बना।
पीएम मोदी ने इस जेस्चर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "बहुत ही शानदार! भारतीय परिधान के प्रति आपका लगाव हमारे देश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के प्रति आपके सम्मान को दर्शाता है।"
ऐतिहासिक कनेसेट संबोधन वाले मोदी बने पहले भारतीय PM
पीएम मोदी ने यरुशलम में इजरायली संसद नेसेट के विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित किया – यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा नेसेट को दिया गया पहला संबोधन है! नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और 'स्पीकर ऑफ द नेसेट' पदक से सम्मानित किया। मोदी ने इस पदक को दोनों देशों की स्थायी मित्रता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित किया।
मोदी के संबोधन की मुख्य बातें
- भारत और इजरायल की प्राचीन सभ्यताओं के बीच गहरे संबंधों का जिक्र।
- टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रक्षा, सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, ग्रामीण विकास, स्थिरता और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में मजबूत आधुनिक साझेदारी।
- 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले को "क्रूर और बर्बर" बताते हुए गहरी संवेदना; कहा कि "किसी भी कारण से नागरिकों की हत्या को उचित नहीं ठहराया जा सकता"।
- आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर।
- क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के प्रयासों (जैसे गाजा पीस इनिशिएटिव) को भारत का पूर्ण समर्थन।
- संबोधन का समापन "अम यिसराएल चाई" (Am Yisrael Chai) के साथ – जो इजरायल के प्रति भारत के अटूट समर्थन का मजबूत संदेश था।
